Success Story: 4 सहेलियां एक साथ बनीं पुलिस कांस्टेबल, सभी ने बिना कोचिंग पहले प्रयास में पाली सफलता
Success Story Rajasthan Police: राजस्थान में एक छोटा सा गांव है सादलवा। यहां की चार बचपन की सहेलियों ने कामयाबी की नई लिखी है, जो हर किसी के लिए प्रेरित करनी वाली है। चारों ने पहले ही प्रयास में राजस्थान पुलिस कांस्टेबल बनने में सफलता हासिल की है।
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में पुलिस कांस्टेबल प्रतीक्षा कुंवर ने बताया कि चारों सहेलियों में दो सगी बहनें भी शामिल हैं। सभी ने एक साथ स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई की। घर पर रहकर तैयारी की है। बिना कोचिंग ही पहले प्रयास में कांस्टेबल बन गईं।

कौन सहेली कहां पोस्टेड?
कृष्णा कंवर-आबू रोड पुलिस थाना, सिरोही (Krishna Kanwar Abu Road Police Station, Sirohi)
प्रतीक्षा कुंवर-सिरोही सदर पुलिस थाना (Pratiksha Kunwar Sirohi Sadar Police Station)
पदम कंवर- शिवगंज पुलिस स्टेशन, सिरोही (Padam Kanwar- Shivganj Police Station, Sirohi)
मनिता कंवर- बरलूट पुलिस स्टेशन, सिरोही (
Manita Kanwar- Barloot Police Station, Sirohi)

पांचवीं सहेली भी बन गई कांस्टेबल
प्रतीक्षा ने बताया कि उन चारों ने राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2021 में कामयाबी हासिल की है जबकि इनकी पांचवीं सहेली भी रवीना भी कांस्टेबल बन गई है। उसने राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2024 में पाली जिले से भाग्य आजमाया था। चारों सहेली वर्तमान में सिरोही जिले में विभिन्न जगहों पर पोस्टेड हैं जबकि पांचवीं रवीना पीटीएसी जयपुर में ट्रेनिंग ले रही है।

वर्दी में देख पिता आईं आंखें
राजस्थान पुलिस कांस्टेबल कृष्णा कंवर और पदम कंवर सगी बहने हैं। इनके पिता रेवत सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। खुद कम पढ़े-लिखे रेवत सिंह ने बेटियों को पढ़ने लिखने का खूब अवसर दिया। मनिता कंवर के पिता का देहांत हो चुका है। प्रतीक्षा के पिता ऑटो चालक हैं। खेतीबाड़ी भी करते हैं। पिता ने बेटियों को खाकी वर्दी में देखा उनकी आंखें भर आई।

टीएसपी क्षेत्र होने का भी फायदा मिला
प्रतीक्षा कहती हैं कि चारों सहेलियों ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आमली से पढ़ाई की। फिर कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही पुलिस कांस्टेबल भर्ती में भाग्य आजमाया। उसी समय इनकी ग्राम पंचायत आमली TSP क्षेत्र में शामिल हो गया था, जिसका भी सभी को फायदा मिला।

टीएसपी क्षेत्र क्या होता है?
सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र को जनजातीय उप-योजना क्षेत्र (टीएसपी) घोषित कर उस क्षेत्र की जनजातीय आबादी के विकास के लिए सरकारें धन भेजती हैं। टीएसपी क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरियों में भी कोटा रखा जाता है।

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