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Success Story: एक डिलीवरी बॉय, दूसरा पंक्चर मिस्त्री का बेटा, दोनों बन गए डिप्टी कलेक्टर

Success Story: झारखंड के दो युवा गिरिडीह के सूरज यादव और बोकारो के अताबुद्दीन अंसारी ने अपने संघर्ष, मेहनत और मजबूत इरादों से राज्य सिविल सेवा की उस मंज़िल को हासिल किया है, जिसे पाने का सपना लाखों युवा देखते हैं। दोनों डिप्टी कलेक्टर बन गए हैं। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि अलग थी, परेशानियां अलग थीं, लेकिन सपना एक था "परिवार की हालत बदलनी है, और समाज में कुछ बनकर दिखाना है।"

Success Story

डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर बने सूरज यादव

झारखंड के गिरिडीह के छोटे से गांव कपिलो में जन्मे सूरज यादव का बचपन आर्थिक तंगी और अभाव में बीता। पिता राजमिस्त्री थे। घर में दो वक्त की रोटी भी कभी-कभी मुश्किल से मिलती थी। लेकिन सूरज के मन में कुछ बड़ा करने का सपना था। उन्होंने रांची जाकर JPSC की तैयारी शुरू की, लेकिन आर्थिक हालात ने उन्हें पढ़ाई के साथ काम करने पर मजबूर कर दिया।

बाइक नहीं थी, लेकिन हिम्मत थी। दोस्तों ने स्कॉलरशिप के पैसे से सूरज के लिए सेकेंड हैंड बाइक खरीदी। सूरज दिन में स्विगी और रैपिडो में डिलीवरी बॉय का काम करते, फिर रात भर पढ़ाई करते। बहन ने घर संभाला, पत्नी ने हौसला दिया।

झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC 2023) में सूरज ने 110 वीं रैंक हासिल की। जब इंटरव्यू में उन्होंने अपनी डिलीवरी बॉय की पृष्ठभूमि साझा की, तो बोर्ड के सदस्य चौंक गए। लेकिन जब उन्होंने डिलीवरी से जुड़े टेक्निकल सवालों के सटीक जवाब दिए, तो हर किसी को समझ आ गया। ये लड़का संघर्ष से तपकर निकला है।

पंक्चर बनाने वाले मिस्त्री के बेटे अताबुद्दीन की उड़ान

बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड में रहने वाले अताबुद्दीन अंसारी के पिता सगीर अंसारी एक साधारण गाड़ी मिस्त्री हैं। पंक्चर बनाने से घर चलता था। संसाधन सीमित थे, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन हौसला कम नहीं था। अताबुद्दीन ने प्लस टू चंदनकियारी स्कूल से पढ़ाई की, फिर स्वामी सदानंद कॉलेज, चास से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया।

उन्होंने बिना कोचिंग, सिर्फ ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल और 8 घंटे की रोजाना पढ़ाई से JPSC की तैयारी की। पहले प्रयास में बीमारी ने परीक्षा प्रभावित की, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 341वीं रैंक हासिल कर ली। उन्होंने कहा, "मुझे अपने पिता से प्रेरणा मिली। उन्होंने हमेशा कहा "बेटा, तू कुछ बड़ा करेगा।" और मैंने उसी सपने को अपना लक्ष्य बना लिया।''

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