Success Story: दो बार इंटरव्यू में हुईं फेल, UPSC क्रैक करने में लगे 6 साल, गजब है इस IFS की कहानी

Success Story: 'गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चले', ये बात पूरी तरह से चरितार्थ होती है उस महिला पर जिसकी कहानी हम आज आपसे सक्केस स्टोरी की कड़ी में शेयर करने जा रहे हैं।

उनकी जगह शायद कोई और होता तो नाकामयाबी से घबराकर कब का हार मान लेता लेकिन इन्होंने ना तो हार मानी और ना ही निराश हुईं बल्कि सफलता अर्जित करके सक्सेस का नई परिभाषा ही लिख डाली।

IFS Pujya Priyadarshini

दरअसल यहां हम बात कर रहे हैं कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2018 में पूरे देश में 11वीं रैंक हासिल करने वाली पूज्य प्रियदर्शिनी की, जो इससे पहले इस परीक्षा में तीन पर असफल हो चुकी थीं, खास बात ये है कि साल 2016 और साल 2017 में तो वो इंटरव्यू राउंड में फेल हुई थीं।

असफल होने के बाद भी वो निराश नहीं हुईं प्रियदर्शिनी

असफल होने के बाद भी वो निराश नहीं हुईं बल्कि दोगुनी मेहनत से तैयारी की और अंत में सफल हुईं और आज वो IFS के पद पर काम करके अपने परिवार का नाम रौशन कर रही हैं।

दो बार इंटरव्यू में हुईं फेल लेकिन नहीं मानी हार

सोशल मीडिया पर भी पूज्य बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं, वो एक मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी काम करती हैं। आपको बता दें कि दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली पूज्य ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से बीकॉम किया है।

अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती थीं पूज्य

इनका सपना अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का था इसलिए इन्होंने ग्रेजुएशन के अंतिम साल में यानी साल 2013 में ही पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी थी लेकिन कामयाब नहीं हो पाई।

मल्टीनेशनल कंपनी में मोटी सैलरी पर किया काम

इसके बाद इन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय न्यूयार्क से लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री प्राप्त की और इसके बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में मोटी सैलरी पर करीब दो साल तक काम किया लेकिन इसके बावजूद इन्होंने यूपीएससी का सपना नहीं छोड़ा और तैयारी करती रहीं।

पूज्य ने हार नहीं मानी और प्रयास जारी रखा

दो बार तो ये इंटरव्यू में आकर आखिरी राउंड में फेल हो गईं लेकिन पूज्य ने हार नहीं मानी और प्रयास जारी रखा और आखिरकार साल 2018 में इन्होंने एग्जाम क्रैक कर ही लिया। अपने इस जूनून के पीछे उन्हें लोगों के ताने भी सुनने भी पड़े लेकिन पूज्य की फैमिली ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।

IAS नहीं बल्कि IFS बनने का विकल्प चुना

हालांकि इतनी अच्छी रैंक के बाद भी इन्होंने IAS नहीं बल्कि आईएफएस बनने का विकल्प चुना और वर्तमान में फ्रांस में Diplomat के रूप में काम कर रही हैं।

'कभी भी असफलता से ना घबराएं '

आज वो लोगों को सलाह देती हैं कि 'कभी भी असफलता से ना घबराएं बल्कि उसका डटकर सामना करें और फेल होने पर अपना आंकलन स्वयं करें और अपनी कमी को दूर करने की कोशिश करें। अगर आपकी लगन सच्ची और मेहनत में ईमानदारी है तो सफलता हर हालत में मिलकर रहेगी। कभी भी मेहनत से जी ना चुराएं और पूरे आत्मविश्वास के साथ हर चुनौती का सामना करें।'

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