Success Story RPSC: 6 साल में 59 बार फेल हुए Ramesh Rajpurohit, फिर इस ट्रिक से सीधे तहसीलदार बने
Ramesh Singh Rajpurohit RAS: रमेश सिंह राजपुरोहित राजस्थान के बाड़मेर में तहसीलदार हैं। साल 2015 में बीटेक करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। 59 बार फेल हुए। 2021 में 197वीं रैंक पाकर RAS परीक्षा पास की।
Barmer Tehsildar Ramesh Rajpurohit Motivational Story: राजस्थान के रमेश सिंह राजपुरोहित की सक्सेस स्टोरी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में मिलने वाली असफलताओं से हार मान लेते हैं।मेहनत करना छोड़ देते हैं।
बार-बार फेल होने पर लोग लक्ष्य तक बदल लेते हैं, मगर रमेश राजपुरोहित की कहानी थोड़ी जुदा है। ये छह साल में विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में 59 बार फेल हुए और फिर तहसीलदार बन गए।
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रमेश राजपुरोहित का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में रमेश राजपुरोहित ने अपनी पूरी कहानी बयां की। इसमें रमेश राजपुरोहित के मजबूत इरादों के सामने तो असफलताओं ने भी हार मान ली। 60वीं बार के प्रयास में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा 2018 में 197वीं रैंक पर पहली बार सफलता हाथ लगी। इनका चयन राजस्थान तहसीलदार सेवा (RTS) में हुआ।

रमेश राजपुरोहित मूलरूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले की धनाऊ तहसील के गांव रबासर के रहने वाले हैं। इनके पिता हालसिंह राजपुरोहित राजकीय प्राथमिक स्कूल रबासर में शिक्षक व मां सुशीला देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।
रमेश व राजेश की सक्सेस स्टोरी एक जैसी
वर्तमान में राजस्थान के नए जिले घंटियाली में तहसीलदार के पद पर कार्यरत रमेश राजपुरोहित से मिलती जुलती सक्सेस स्टोरी राजस्थान के ही झुंझुनूं के खेतड़ी के गांव रामनगर के राजेश गुर्जर की है, जो 50 से ज्यादा बार फेल होने के बाद एक साथ चार सरकारी नौकरी हासिल कर ली। फिलहाल राजेश भारतीय रेलवे में नागौर जिले के गोटन रेलवे स्टेशन पर तैनात है। राजेश गुर्जर की पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
असिस्टेंट प्रोफेसर से की शादी
25 मई 1993 को जन्मे रमेश राजपुरोहित सबसे बडे हैं। दो छोटी बहन दिव्या व ममता कॉलेज की पढ़ाई कर रही हैं। एक भाई भीमसिंह राजपुरोहित व बहन गुड्डिया प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। रमेश राजपुरोहित की शादी मार्च 2023 में बीकानेर की विनीता राजपुरोहित से हुई, जो वर्तमान में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर में असिस्टेंट पद पर सेवाएं दे रही हैं।

रमेश राजपुरोहित की शिक्षा
बाड़मेर तहसीलदार रमेश राजपुरोहित ने बताया कि उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से पूरी हुई। फिर ये अपने गांव से करीब सौ किलोमीटर दूर बाड़मेर जिला मुख्यालय आ गए और यहां छात्रावास में रहकर निजी स्कूल बाल मंदिर व मयूर नोबल से दसवीं व बारहवीं की परीक्षाएं पास कीं। तकनीकी विश्वविद्यालय बीकानेर से साल 2015 में बीटेक (मैकेनिकल) किया।
रमेश राजपुरोहित की 59 असफलताएं
रमेश राजपुरोहित कहते हैं कि साल 2016 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। शुरुआती डेढ़ साल में केंद्रीय सेवाओं में जाने का प्रयास किया। गेट, एसएसजी, रेलवे, सीजीएल और बैंकिंग सेक्टर के इतने सारे फॉर्म भर डाले कि औसतन हर सप्ताह ही कोई ना कोई एग्जाम देता। यूपीएससी की इंजीनियरिंग सेवा में भी दो बार भाग्य आजमाया। इसके बाद स्टेट लेवल की परीक्षाओं के खूब फॉर्म में भरे। केंद्र व स्टेट स्तर की कुल 60 प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया। 59 में फेल हुआ।

आरएएस परीक्षा 2018 कौनसी ट्रिक से पास की?
रमेश सिंह राजपुरोहित के तहत लगातार मिल रही असफलताओं से एक बात समझ आई कि मेरी स्ट्रेटेजी सही नहीं थी। मैं एक ही समय में दस-दस परीक्षाओं की तैयारी किया करता था। फिर मैंने आरएएस 2018 में सब कुछ छोड़कर सिर्फ इसी पर फोकस रखा। पहले ही प्रयास में पास हो गया। साल 2021 में रिजल्ट आया था। आरटीएस सर्विस कैडर तहसीलदार बन गया।












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