महज 8 साल की उम्र में अपराजिता ने पिता को खोया...पर नहीं हारी हिम्मत, बन गईं सिक्किम की पहली महिला IPS
Aparajita Rai IPS Success Story: यूपीएससी की परीक्षा भारत में सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। इस परीक्षा को पास करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। यूपीएससी की परीक्षा को पास करने वाले कई लोगों के पीछे उनकी संघर्षपूर्ण कहानी भी छुपी होती हैं, जिन्हें पढ़ और सुनकर आंखें तक नम हो जाती है। साथ ही, उन्हें दिल से सलूट करने का मन भी करता है। आज हम आपके लिए ऐसी एक कहानी लेकर आए हैं आईपीएस अपराजिता राय की।
अपराजिता राय के नाम सिक्किम की पहली महिला आईएएस अधिकारी होने की उपलब्धि हैं। अपराजिता राय उन हालातों से निकल कर आईपीएस अधिकारी बनी है, जहां किसी के पास भी टूट जाने का पर्याप्त कारण होता है। अपराजिता महज आठ साल की उम्र से इन हालातों के साथ दो-दो हाथ करती आई हैं। तो चलिए जाते हैं सिक्किम की पहली महिला Aparajita Rai IPS के बारे में...

महज 8 साल की उम्र सिर से उठ गया था पिता का साया
अपराजिता राय एक एजुकेटेड फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता ज्ञानेंद्र राय सिक्किम में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर थे और मां रोमा राय एक शिक्षिका थीं। लेकिन, जब अपराजिता महज 8 साल की थीं तभी उनके सिर से उनके पिता का साया उठा गया। ऐसे में सारी जिम्मेदारी अपराजिता की मां रोमा राय पर आ गई। अपराजिता की मां रोमा राय ने उनके हौसलों को और मजबूत बनाया। साथ ही साथ हालातों से लड़ते हुए उन्होंने अपनी बेटी को अच्छी परवरिश दी।
सरकारी कर्मचारियों के रवैये को देखकर लिया था IPS बनने का फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपराजिता राय ने भी कम उम्र में अपनी मां का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। इस दौरान कई बार उनका अपनी मां के साथ सरकारी ऑफिसों में भी जाना हुआ। इस दौरान वह सरकारी कर्मचारियों के जनता के प्रति असंवेदनशील रवैये को देखा और उससे परिचित भी हुई। यह सब देखकर उन्होंने सिस्टम का हिस्सा बनने का फैसला किया। अपने लिए गए इसी फैसला के दो दशक बाद अपराजिता सिक्किम की पहली महिला IAS बनीं।
अपराजिता ने 12वीं में पूरे राज्य में किया था टॉप
अपराजिता राय बचपन से ही इंटेलिजेंट स्टूडेंट रही है 12वीं की परीक्षा में 95% अंक लाकर सिक्किम राज्य में टॉप किया। राज्य में टॉप करने पर उन्हें श्रीमती रत्ना प्रधान मेमोरियल ट्रॉफी से सम्मानित भी किया गया था। खबरों के मुताबिक, अपराजिता के पिता चाहते थे कि वो वकालत करे और बड़ी वकील बने। अपने पिता के इससपने को पूरा करने के लिए उन्होंने साल 2009 में पश्चिमी बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूडिशियल साइंस, कोलकाता से बीए एलएलबी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की।
दो बार क्रैक किया UPSC एग्जाम
भले ही अपराजिता ने वकालत कर ली और ज्यूरिडिशियल साइंसेज में गोल्ड मेल हासिल किया। लेकिन, उनका मन नहीं लग रहा था। वह समाज में कुछ बेहतर करना चाहती थी, इसलिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। साल 2021 में अपराजिता ने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। इस परीक्षा में उन्होंने 950 में से 768वीं रैंक हासिल की। यूपीएससी एम इतनी रैंक आने के बावजूद वह खुश नहीं थीं। इसी कारण उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी एग्जाम की तैयारी शुरू की।
28 साल की उम्र में बनी सिक्किम की पहली महिला IPS
साल 2012 में उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और इस बार उन्होंने 368 रैंक हासिल की। अपराजिता ने महज 28 साल की उम्र में गोरखा गर्ल के नाम सिक्किम की पहली महिला IPS अधिकारी बनने का रिकार्ड भी अपने नाम दर्ज कराया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपराजिता राय पश्चिम बंगाल कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। वह तेजतर्रार पुलिस अधिकारी के साथ अच्छी खिलाड़ी भी हैं। वह ऑल इंडिया पुलिस बैडमिंटन चैंपियनशिप में रनर-अप भी रह चुकी हैं।












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