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Success Story: कैलाश हाकिम ने IAS की तैयारी छोड़ बने बिजनेस टाइकून, कभी सूरत स्‍टेशन पर गुजारी रातें

Kailash Hakim Surat from Malsisar Jhunjhunu: सूरत व्‍यापार मंडल एशिया में 70 हजार व्‍यापारियों वाली सबसे बड़ी संस्‍था है। इसके अध्‍यक्ष कैलाश हाकिम की कहानी बड़ी दिलचस्‍प है। ये कभी IAS बनने की तैयारी किया करते थे, मगर फिर अपनी मेहनत व लगन से बिजनेस टाइकून बन गए। ।

सूरत व्‍यापार मंडल अध्‍यक्ष कैलाश हाकिम की जड़ें राजस्‍थान के झुंझुनूं जिले के मलसीसर से जुड़ी हैं। हालांकि वर्तमान में कैलाश हाकिम सिटी लाइट एरिया सूरत में निवास करते हैं।

Kailash Hakim Surat from Malsisar Jhunjhunu

सूरत व्‍यापार मंडल अध्‍यक्ष का इंटरव्‍यू

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में कैलाश हाकिम ने मलसीसर से सूरत पहुंचकर संघर्ष करने और फिर नामी व्‍यापारी बनने तक की पूरी कहानी शेयर की, जो हर किसी को प्रेरित करने वाली है। इसमें विपरीत हालात में कभी हार नहीं मानने वाली जिद है।

पिता पांच बार रहे सरपंच

म‍लसीसर के 5 बार सरपंच रहे संतोष हाकिम के बेटे कैलाश हाकिम ने साल 1995 में झुंझुनूं के सेठ मोतीलाल कॉलेज से बीकॉम की डिग्री ली। सामने दो ऑप्‍शन थे। सीए बनना या आईएएस अफसर। जयपुर जाकर यूपीएससी की तैयारी करने लगे।

Kailash Hakim Surat from Malsisar Jhunjhunu

मुंहबोले 'मामाजी' विनोद केडिया के साथ आए सूरत

इसी दौरान ननिहाल सूरजगढ़ के मुंहबोले 'मामाजी' विनोद केडिया से मुलाकात हुई। वे काम-धंधे के सिलसिले सूरत रहा करते थे। कैलाश हाकिम जयपुर में रहकर यूपीएससी की तैयारी जरूर कर रहे थे, मगर उनके डीएनए का 'बणिया' अफसर बनने की बजाय व्‍यापार करना चाहता था।

15 सौ रुपए महीने की नौकरी की

हालांकि वे विनोद केडिया के साथ सूरत आ गए। सोचा यहां रहकर यूपीएससी की तैयारी करूंगा, क्‍योंकि मोतीलाल कॉलेज में तीन साल लगातार टॉपर रहे थे। राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय में आठवीं रैंक हासिल की थी। यूपीएससी की तैयारी का खर्च निकालने के लिए 1500 रुपए महीना में लिपिक की नौकरी भी की।

Kailash Hakim Surat from Malsisar Jhunjhunu

सूरत में धागे की दलाली का काम शुरू

मन लगाकर लिपिक का काम किया। तनख्‍वाह छह माह में 10 हजार पहुंच गई और इसी दौरान कैलाश हाकिम को सूरत में साड़ी बनाने में काम आने वाले धागे की खरीद-फरोख्‍त की समझ भी हो गई। नतीजतन इन्‍होंने लिपिक की नौकरी छोड़ धागे की दलाली का काम शुरू कर दिया।

कैलाश हाकिम कहते हैं कि 26 मई 1995 को सूरत पहुंचा था। शुरुआती दिनों में विनोद केडिया के पास रहता था, मगर पिता के निधन के कारण उनको राजस्‍थान लौटना पड़ा। ऐसे में कैलाश के लिए सूरत में रह पाना मुश्किल हो गया था।

Kailash Hakim Surat from Malsisar Jhunjhunu

थियेटर में सोया करते थे

विनोद केडिया से साथ छूटने के बाद कैलाश हाकिम ने कभी सूरत रेलवे स्‍टेशन पर सोकर रात गुजारी तो कभी सिनेमा हॉल में नौकरी करने वाले मलसीसर के एक वॉचमैन की मदद थियेटर में रहा करता था। ऐसे में हालात में भी कैलाश सूरत में ही रहे। मलसीसर वापस नहीं लौटे।

धीरे-धीरे धागे की दलाली का काम चल पड़ा। कमाई होने लगी। करीब एक लाख 70 हजार रुपए पास जोड़े। बड़े भाई अशोक हाकिम को अपने पास सूरत बुला लिया। दोनों ने मिलकर लाजरी साड़ी की दुकान खोली, जिससे तीन साल में दस गुना तक मुनाफा कमाया।

Kailash Hakim Surat from Malsisar Jhunjhunu

सिंघाना की गरिमा से हुई शादी

कैलाश हाकिम कहते हैं कि साल 2000 में सिंघाना निवासी गरिमा से शादी हुई। उसके बाद तो तरक्‍की को मानो पंख ही लग गए। साल 2015 आते-आते तो हम सूरत के टॉप व्‍याव्‍यापारियों की लिस्‍ट शामिल हो गए। प्रीटिंग व कपड़ा बुनाई की मिल्‍स डाल ली। हिमानी साड़ी ब्रांड बन गया। छह माह पहले ही सूरत व्‍यापार मंडल का अध्‍यक्ष चुना गया हूं।

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