जज्बे को सलाम! सिविल इंजीनियर की नौकरी छोड़ चट्टानों को सींचा, आज हो रहा मालामाल ये शख्स

Farmering on Rocks: नागपुर में सिविल इंजीनियर की नौकरी करने वाले झांसी के एक युवक ने अपनी पसंद को पैशन बना लिया। जिसके बल पर नौकरी छोड़ अब लाखों कमा रहा है। इतना ही नहीं, पत्थरों पर अपनी तकदीर भी लिख रहा है।

Farmering on Rocks: कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो एक व्यक्ति पथरीली चट्टानों को भी उपजाऊ मिट्टी में बदल सकता है। जिसपर आपकी मेहनत की फसल लहलहा उठती है। बस, मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मसमर्पण होना चाहिए फिर, सफलताएं आपको ऊंचाइयों तक पहुंचा ही देती हैं।

कुछ ऐसा ही झांसी विकास खंड बबीना की ग्राम पंचायत डगरवाहा निवासी सुरेश कुशवाहा ने चट्टानों पर ही अपनी तकदीर लिख दी है। कुशवाहा पथरीली जमीन को अपने मेहनत से सींचकर लाखों की आमदनी उठा रहे हैं। आइए आपको मिलवाते हैं सुरेश कुशवाहा से...

Farmering on Rocks

किसान के परिवार में पैदा हुए 38 वर्षीय सुरेश कुशवाहा का बचपन से ही खेती, किसानी और पर्यावरण से काफी लगाव रहा। जिसके चलते साल 2016 में नागपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग करने के बाद भी हमेशा खेती की तरफ झुकाव बना रहा। सबसे पहले नेशनल हाईवे-25, 26 में सुपरवाइजर के पद पर तैनाती मिली। उसके बाद बतौर सिविल इंजीनियर के पद पर नागपुर हाईवे में उनकी तैनाती हुई। कुशवाहा बताते हैं कि हाईवे किनारे बने खेतों को देखकर हमेशा एक खिंचाव महसूस करता रहा। खाली वक्त में उन खेतों के किसानों से जानकारी हासिल करना बेहद पसंद था। जैसे कि सिंचाई के लिए क्या जरूरी बातें हैं।

'नौकरी छोड़ थाम लिया हल'

सुरेश कुशवाहा बताते हैं कि साल 2020 से नौकरी के साथ-साथ कृषि के काम में जुट गए। लेकिन, अपनी पहली पसंद खेती पर पूरा फोकस न कर सके। ऐसे में साल 2021 में सालाना 3 लाख के पैकेज की सिविल इंजीनियर की नौकरी छोड पूरा वक्त खेती को देने फैसला किया। लेकिन, परिवार में सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा होने के चलते वापस खेती की ओर जाने में आर्थिक संकट की चिंता भी हुई। पिता पुंजी लाल कुशवाहा ने जैसे-तैसे इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई थी। ऐसे में खेती में फिर से वापसी करना फैसला कठिन था। लेकिन, परिवार से बातचीत के बाद आगे कदम बढ़ाया।

सुरेश कुशवाहा यह भी बताते हैं कि डगरवाहा, झांसी का एक पहाड़ी इलाका है। यहां की जमीन पथरीली और उपजाऊ लायक नहीं है। नौकरी छोडकर नागपुर से झांसी अपने गांव डगरवाहा वापस लौट आया। गांव हमारी 3.5 एकड़ भूमि है। इसमें लगभग 1 एकड़ समतल भूमि है, जबकि बाकी पथरीली है। ऐसे में नौकरी के वक्त हासिल किया किसानी को लेकर ज्ञान का इस्तेमाल किया। कुछ मदद इंटरनेट से भी मिली। जिसकी मदद से पथरीली जमीन पर सबसे पहले लौकी और तुरई की खेती की।

25 हजार के मुनाफा से शुरू हुआ सफर लाखों तक पहुंचा

सुरेश कुशवाहा बताते हैं कि सबसे पहले लौकी की खेती से करीब 25000 रुपए का मुनाफा हासिल किया। उसके बाद धीरे-धीरे कारवां आगे बढ़ता गया। लौकी के बाद, तोराई, धान, मूंगफली की खेती भी शुरू की। वर्तमान समय में सालाना टर्नओवर तीन लाख से ज्यादा है। कुशवाहा बताते हैं कि कमाई की मदद से खेती के भविष्य को भी आगे बढाएंगे। समस्त उपज के लिए सिर्फ जैविक खाद का प्रयोग किया है।

अटल भूजल योजना का मिला साथ

वहीं, सरकार की तरफ से लाभ मिलने के सवाल पर सुरेश कुशवाहा बताते हैं कि 2019 में शुरू हुई अटल भूजल योजना का सहयोग हासिल हुआ है। डगरवाहा ग्राम पंचायत अटल भूजल योजना के अंतर्गत चयनित है। योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत डगरवाहा में साल 2022 में एक चेक डेम, खेत समतली करण, मेंड़ बंधान, खेत तालाब निर्माण का कार्य अटल भूजल योजना के अंतर्गत किया गया है। सिंचाई की आधुनिक पद्दयती ड्रिप इरीगेशन, स्प्रिंकलर इरीगेशन आदि के द्वारा खेती की जा रही है। वर्तमान में हम स्प्रिंकलर इरीगेशन व रैन गन इरीगेशन के द्वारा सिंचाई कर रहे हैं। इनकी वजह से, अन्य अन्य कृषकों की अपेक्षा अधिक मुनाफा कमा रहा हूं।

जल्द रॉक्स पर उगेगा ड्रेगन फ्रूट

मक्का, मूंगफली, उर्द, मूंग, तिल, धान, सफेद मूसली की फसलें लगाई हैं। वहीं, सब्जियों में अदरक, तोराई, लौकी, कद्दू, करेला, भिंडी, मिर्च, बैंगन, धनिया उगा रहे हैं। वहीं, फल आहार में मुसम्मी, संतरा, आम, अमरूद, आमला, राय करौंदा, जामुन, शरीफा, सेब, सीताफल, अंगूर, कीवी, स्ट्रॉबेरी की खेत भी लहलहा रहे हैं। खास बात यह है कि पिछले साल ड्रेगन फ्रूट भी लगाया है। संभावना है कि जल्द ही ड्रेगन फ्रूट निकलेगा।

खेती में जुटा कुशवाहा परिवार

सुरेश कुशवाहा बताते हैं कि मां पार्वती, पिता पुंजी लाल, पत्नी संध्या, भाई महेश और उनका परिवार खेती में हाथ बंटा रहा है। सुरेश की 5 बेटियां हैं। सभी की शिक्षा पर भी सुरेश काफी जोर दे रहे हैं।

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