YouTube से टाइमपास करने वाले Shreyas Mishra कैसे बने JEE टॉपर? 100 परसेंटाइल पर कब्जा, पिता क्या करते हैं?

JEE Main 2026 Topper Shreyas Mishra Success Story: जेईई मेन्स 2026 का रिजल्ट जारी होते ही देशभर में सनसनी फैल गई। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने न सिर्फ स्कोर, बल्कि परसेंटाइल और रैंक भी घोषित कर दी। इस बार करीब 16 लाख छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। पहले सत्र में श्रेयस मिश्रा ने 100 परसेंटाइल हासिल कर दिल्ली स्टेट टॉप किया और पूरे देश के 12 परफेक्ट स्कोरर्स में शामिल हुए।

दूसरे सत्र में उन्होंने 99.99 परसेंटाइल के साथ ऑल इंडिया 23वीं रैंक हासिल की। दिल्ली का ये इकलौता टॉपर अब हर युवा का इंस्पिरेशन बन चुका है। लेकिन ये सफलता कोई चमत्कार नहीं। ये सालों की जिज्ञासा, सख्त अनुशासन, हॉस्टल की तन्हाई और YouTube एडिक्शन से निकलने की लड़ाई का नतीजा है। आज हम आपको ग्रेटर नोएडा वेस्ट की रॉयल नेस्ट सोसाइटी से जुड़े 17 साल के श्रेयस मिश्रा की पूरी कहानी बताते हैं। बचपन से शुरू हुई तैयारी, हॉस्टल लाइफ का सच, सोशल मीडिया से दूरी और वो 5 गोल्डन टिप्स जो आपको भी टॉपर बना सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं...

JEE Main 2026 Topper Shreyas Mishra Success Story

परिवार की जड़ें और ग्रेटर नोएडा वेस्ट का घर

श्रेयस मिश्रा के पिता सुमंत मिश्रा मूल रूप से ओडिशा के हैं। नौकरी की तलाश में दिल्ली-एनसीआर आए और यहीं बस गए। आज वो साइबर सुरक्षा सलाहकार हैं। मां प्राइवेट यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। पूरा परिवार ग्रेटर नोएडा वेस्ट की रॉयल नेस्ट सोसाइटी में रहता है। घर में पढ़ाई का माहौल था, लेकिन श्रेयस ने कभी 'परिवार ने दबाव डाला' नहीं कहा। उन्होंने खुद अपनी राह चुनी।

उनकी एक छोटी बहन है, जो आठवीं कक्षा में पढ़ती है। श्रेयस हॉस्टल में रहकर पढ़ते रहे, इसलिए घर महीने में सिर्फ दो बार जाते थे। हॉस्टल में भी उनके बहुत कम दोस्त थे। पूरा ध्यान पढ़ाई पर। वे कहते हैं कि हॉस्टल की तन्हाई और सोशल मीडिया से दूरी ने मुझे ये मुकाम दिलाया। पिता

रोहिणी के कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल से हॉस्टल तक की यात्रा

श्रेयस दिल्ली के रोहिणी स्थित कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल के 12वीं क्लास के छात्र हैं। श्रेयस बताते हैं कि वो कभी घंटों के हिसाब से पढ़ाई नहीं करते थे। जितनी देर पढ़ता, पूरी एकाग्रता से पढ़ता। उन्हें खुद यकीन नहीं हो रहा कि उन्होंने ऑल इंडिया 23वीं रैंक हासिल कर ली। बोर्ड एग्जाम का रिजल्ट आने का इंतजार है।

पढ़ाई का तरीका और रोज अभ्यास। हर विषय को बराबर समय, लेकिन कमजोर विषयों पर ज्यादा ध्यान। NCERT से कॉन्सेप्ट्स क्लियर, फिर प्रैक्टिस। क्लास 12 के बोर्ड के साथ जेईई एडवांस (JEE Advanced) की तैयारी भी चल रही है।

पांचवीं से जिज्ञासा, छठी से JEE की तैयारी, 12-14 घंटे का रूटीन

श्रेयस की तैयारी एक-दो साल की नहीं। बल्कि, पांचवीं क्लास के बाद से ही हर चीज पर सवाल उठते थे। जवाब ढूंढने की आदत पड़ गई। यही वजह है कि 17 साल की उम्र में उन्होंने इतिहास रच दिया। छठी क्लास से JEE की तैयारी शुरू। रोजाना 12-14 घंटे पढ़ाई का रूटीन। लेकिन नया खुलासा ये है कि वे घंटों गिनकर नहीं पढ़ते थे। पूरी एकाग्रता से पढ़ते थे। क्लास 6 से मैथ्स की गहराई में उतरे, क्लास 11 से पूरा फोकस JEE पर। टॉपिक्स एक्सप्लोर करना और उनकी गहराई में जाना उनका शौक था। क्रिकेट खेलते और क्लासिकल म्यूजिक सुनते, ये उनके स्ट्रेस बस्टर्स थे। पढ़ाई के साथ बैलेंस बनाए रखा।

YouTube एडिक्शन से निकलने का संघर्ष: 'ये एडिक्शन है, मुझे छोड़ना पड़ा'

टाइटल में जानबूझकर लिखा कि YouTube पर घंटों बिताकर कैसे टॉपर बने? क्योंकि यही वो पॉइंट है, जो हर छात्र को चुभता है। क्लास 9 और 10 में श्रेयस भी YouTube के चक्कर में फंस गए थे। घंटों वीडियो देखकर समय बर्बाद। श्रेयस बताते हैं कि उन्होनें खुद ही फैसला लिया कि ये एडिक्शन है। सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप सब हटा दिया। माइंड डाइवर्ट न हो, इसलिए हॉस्टल में भी फोन पर सिर्फ जरूरी ऐप्स। नतीजा ये हुआ कि सेशन-1 में 100 परसेंटाइल, सेशन-2 में 99.99 (सिली मिस्टेक की वजह से परफेक्ट स्कोर न बन सका)। वे हंसते हुए कहते हैं कि प्रैक्टिस के लिए सेशन-2 दिया था।

JEE क्रैक करने के 5 गोल्डन टिप्स

1. कॉन्सेप्ट्स क्लियर करो - NCERT पहले, फिर प्रैक्टिस

JEE सिर्फ रट्टा नहीं, एनालिटिकल स्किल्स टेस्ट करती है। श्रेयस कहते हैं, "कॉन्सेप्ट क्लियर होंगे तभी एग्जाम क्रैक कर पाओगे।" NCERT पढ़ो, फिर रेफरेंस बुक्स। बुनियाद मजबूत हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं।

2. रोज अभ्यास और मॉक टेस्ट अनिवार्य

'मैं रोज अभ्यास करता था। कमजोर विषयों पर ज्यादा समय।' मॉक टेस्ट से नंबर्स बूस्ट हुए। गलतियों से सीखो, बार-बार सॉल्व करो।

3. कूल रहो, तनाव मत लो

पढ़ाई तनाव न बने। कोई हॉबी फॉलो करो - जैसे श्रेयस क्लासिकल म्यूजिक सुनते थे। बोर्ड एग्जाम भी अच्छे हुए। अब JEE Advanced पर फोकस। टारगेट - IIT Bombay, Computer Science। इलेक्ट्रिकल और CS दोनों में दिलचस्पी।

4. डिस्ट्रैक्शन से बचो - हॉस्टल लाइफ का फायदा

'सोशल मीडिया से दूर रहना जरूरी है।' क्लास 9-10 में YouTube ने टाइम वेस्ट किया, फिर छोड़ दिया। हॉस्टल में कम दोस्त, पूरा फोकस, सिर्फ पढ़ाई पर रखा। यही है, सफलता का राज।

5. Consistency ही मूलमंत्र - बिना रुके आगे बढ़ो

लगातार रूटीन पर कायम रहने की आदत ने मुझे ये मुकाम दिया। घंटों की गुलामी नहीं, पूरी एकाग्रता। अगर सफलता चाहिए तो मंजिल तक बिना रुके चलते रहो।

सेशन-1 vs सेशन-2: स्मार्ट स्ट्रैटजी और बैलेंस

सेशन-1 में 100 परसेंटाइल मिलने के बाद भी सेशन-2 दिया - सिर्फ प्रैक्टिस के लिए। 99.99 परसेंटाइल आया। वे कहते हैं कि सिली मिस्टेक हो गई, लेकिन खुश हूं। दोनों सेशन्स में टॉप परफॉर्मेंस ने उन्हें दिल्ली का इकलौता टॉपर बनाया। अब JEE Advanced पर पूरा फोकस।

श्रेयस से सीख: सफलता मेहनत, बैलेंस और फोकस का कॉम्बिनेशन

श्रेयस मिश्रा की कहानी सिर्फ एक टॉपर की नहीं। ये उन लाखों छात्रों के लिए मैसेज है जो 18 घंटे पढ़ने का दबाव महसूस करते हैं, लेकिन बर्नआउट हो जाते हैं। उन्होंने साबित किया कि 12-14 घंटे की फोकस्ड पढ़ाई, हॉबी, डिस्ट्रैक्शन-फ्री हॉस्टल लाइफ और रोज प्रैक्टिस सभी मिलकर परफेक्ट रिजल्ट बने।

आज जब 16 लाख छात्र उनके नाम की चर्चा कर रहे हैं, तो श्रेयस का संदेश साफ है कि जिज्ञासा रखो, रूटीन बनाओ, डिस्ट्रक्शन हटाओ और लगातार आगे बढ़ते रहो।

श्रेयस मिश्रा ने JEE Main 2026 में न सिर्फ दिल्ली टॉप किया, बल्कि पूरे देश को दिखा दिया कि सपने बड़े हो सकते हैं, लेकिन रास्ता संतुलित, अनुशासित और स्मार्ट होना चाहिए। अब उनकी नजर IIT Bombay पर है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट का ये लड़का पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है। अगर आप भी जेईई अभ्यर्थी हैं, तो आज से शुरू करें। NCERT खोलें, मॉक टेस्ट शेड्यूल बनाएं, YouTube की लत पर कंट्रोल रखें और हॉबी को जगह दें। क्योंकि जैसा श्रेयस ने कहा कि बिना रुके लगातार काम करते रहो, मंजिल खुद-ब-खुद मिल जाएगी।

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