Photo: 40 दिव्यांग हीरोज ने अपने टैलेंट से दर्शायी अपनी प्रतिभा, लोगों का नजरिया बदलने की कोशिश

मुंबई। नारायण सेवा संस्थान (एनएसएस) की ओर से मुंबई के जेवीपीडी ग्राउंड में आयेाजित दिल छू लेने वाले इवेंट 14 वें 'दिव्यांग टैलेंट एंड फैशन शो' में दिव्य हीरोज ने व्हीलचेयर, बैसाखी, कैलीपर्स और कृत्रिम अंगों पर अपने वजन को संभाले हुए आश्चर्यजनक स्टंट और नृत्य करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी और पोलियो जैसी गंभीर चिकित्सीय स्थितियों से पीड़ित 40 से अधिक दिव्यांगों ने मुंबई में लुभावने स्टंट, डांस सीक्वेंस और रैंप वॉक किया। यह दूसरा मौका था, जब मुंबई में 'दिव्यांग टैलेंट एंड फैशन शो' का आयोजन किया गया।

दर्शकों की तरफ से जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिली

दर्शकों की तरफ से जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिली

मुंबई के दिल में इस एक दिवसीय मेगा सेलिब्रेशन ने दर्शकों को प्रेरित किया और यही कारण रहा कि इसे दर्शकों की तरफ से जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिली। दिव्यांग कलाकारों के इस शानदार प्रदर्शन को देखकर ऐसे अनेक दिव्यांग लोगों को शायद गर्व की अनुभूति हुई होगी, जो इस कार्यक्रम के आयोजक नारायण सेवा संस्थान के सहयोग से अपने जीवन को बदलने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। आयोजन के दौरान पद्मश्री कैलाश ‘मानव' अग्रवाल और नारायण सेवा संस्थान के प्रेसीडेंट श्री प्रशांत अग्रवाल ने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक को सम्मानित किया।
दिव्य हीरोज ने चार दौर के फैशन शो में भाग लिया। उनके लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई थीं, जैसे - क्रच राउंड, ग्रुप डांस राउंड, व्हीलचेयर राउंड और कैलीपर राउंड।

ज्योति मस्तकर ने मराठी लोक नृत्य लावणी प्रस्तुत किया

ज्योति मस्तकर ने मराठी लोक नृत्य लावणी प्रस्तुत किया

14 वें दिव्यांग टैलेंट शो के दौरान मुंबई की 29 वर्षीय कलाकार ज्योति मस्तकर ने मराठी लोक नृत्य लावणी प्रस्तुत किया। ज्योति मुंबई के भीड़भाड़ वाले इलाकों में पली-बढ़ी, उसका एक हाथ दूसरे की तुलना में छोटा था। वह बताती है कि उसके आस-पास के लोग नृत्य के प्रति उसके रुझान को देखकर तमाम तरह की बातें करते थे, लेकिन खुद उसने अपने आप को कभी भी सबसे कठिन हालात में भी झुकने नहीं दिया। इस अवसर पर अग्रवाल ने कहा, हम हर ऐसे दिव्यांग शख्स को नारायण सेवा संस्थान में मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर और हार्डवेयर मरम्मत के कौशल को निशुल्क सीखने के लिए आमंत्रित करते हैं, जो जरूरतमंद और आगे बढना चाहता है। यथासंभव हम इनके प्लेसमेंट के लिए भी प्रयास करेंगे। हम दिव्यांग हीरोज को मान्यता देते हुए उनके लिए निषुल्क सुधारात्मक सर्जरी, मुफ्त कृत्रिम अंग, व्हील चेयर प्रदान करते हुए उनके मन में जीवन के प्रति आस्था फिर से जगाना चाहते हैं।

नारायण सेवा संस्थान ने किया था आयोजन

नारायण सेवा संस्थान ने किया था आयोजन

इस अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के प्रेसीडेंट प्रशांत अग्रवाल ने कहा, हमारा लक्ष्य यह है कि दिव्यांग लोग बेहतर तरीके से अपनी जिंदगी जी सकें और इसके लिए उन्हें पर्याप्त कौशल प्रदान करने, स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्रदान करने और उन्हें शिक्षित करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करने का प्रयास किया जाता है, ताकि वे समाज में दूसरे लोगों के साथ बराबरी पर खड़े हो सकें। नारायण सेवा संस्थान दिव्यांग लोगों के लिए 1100 बिस्तरों वाला अस्पताल संचालित करता है, जहां यह उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए निषुल्क मेजर सर्जरी का आयोजन करता है। साथ ही, उन्हें विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्रमों के तहत एक विशिष्ट स्ट्रीम में कौशल प्राप्त करने में मदद करता है और उन्हें रोजगार खोजने में भी सहायता करता है। नारायण सेवा संस्थान के परिसर में एक स्किल सेंटर भी है जहाँ सिलाई कार्य का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

नारायण सेवा संस्थान के बारे में

नारायण सेवा संस्थान के बारे में

नारायण सेवा संस्थान दुनिया के विशेष रूप से सक्षम और वंचित लोगों के लिए एक बेहतरीन स्थान है। पद्मश्री कैलाश ‘मानव‘ अग्रवाल द्वारा 1985 में स्थापित नारायण सेवा संस्थान एक धर्मार्थ संगठन है जो दिव्यांग लोगों के समुदाय को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर समाज की मुख्यधारा लाने के लिए सेवा प्रदान करता है। झीलों की नगरी उदयपुर के पास बड़ी गांव में स्थित नारायण सेवा संस्थान प्रकृति की गोद में अरावली पहाड़ियों की सीमा से घिरा हुआ है। नारायण सेवा संस्थान ‘दिव्यांग लोगों के लिए एक ऐसा स्मार्ट कैंपस‘ है, जहां ‘जीवन के किसी भी स्तर पर, किसी भी तरह से वंचित अनुभव करने वाले लोगों के लिए‘ सभी सुविधाएं जुटाई गई हैं। संस्थान भारत में अपनी 480 शाखाओं और विदेषों में 86 शाखाओं के साथ देष में दिव्यांगता को कम करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए काम करता है। प्रतिदिन एक निशुल्क वाहन उदयपुर रेलवे स्टेशन पर मरीजों और उनके परिवारों को लेने के लिए पहुंचता है और इसके बाद गेस्ट हाउस में उनके लिए मुफ्त आवास और भोजन की व्यवस्था की जाती है।

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