भारत की बेटी: सियाचिन पहुंचीं Captain Shiva Chauhan ने रचा इतिहास, जानिए वीरांगना की प्रेरक कहानी-VIDEO
दुनिया की सबसे ऊंची और बर्फीली बैटलफील्ड सियाचिन का नाम सुनकर ही सिहरन होती है। हालांकि, वीर प्रसूता मां भारती की कोख से जन्मे वीर सैनिक यहां भी देशप्रेम की मिसाल कायम करते हैं। जानिए ऐसी ही वीरांगना कैप्टन शिवा चौहान को

Captain Shiva Chauhan एक ऐसी वीरांगना का नाम है, जिसका नाम भारत के स्वर्णिम इतिहास में जीते जी अमर हो चुका है। ऐसा इसलिए क्योंकि कैप्टन शिवा सियाचिन के कुमार पोस्ट पर पहुंचने वाली भारत की 'पहली महिला सैनिक' हैं। कैप्टन शिवा के बारे में जानना काफी रोमांचक और इंस्पायरिंग है। कैप्टन शिवा के देशप्रेम, कठिन प्ररिश्रम और सेना की चुनौतीपूर्ण भूमिका के प्रति उत्साह के कायल खुद पीएम मोदी भी हैं। दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण और ऊंची बैटलफील्ड में तैनात की गईं कैप्टन शिवा से जुड़ी कुछ प्रेरक बातें जानिए

युद्धक्षेत्र में दुस्साहसी महिलाएं
दरअसल, 15,600 फीट की ऊंचाई पर सियाचिन ग्लेशियर के कुमार पोस्ट पर सेवा देने पहुंचीं पहली महिला अधिकारी कैप्टन शिवा चौहान इस बात का प्रमाण हैं कि वीरांगनाओं को जन्म देने वाले देश भारत की बेटियां किसी चुनौती से डरने वाली नहीं। इन दुस्साहसी महिलाओं से कोई युद्धक्षेत्र अछूता नहीं है। कैप्टन शिवा इस बात की भी मिसाल हैं।

माइनस 40 डिग्री में पहली महिला अधिकारी!
कैप्टन शिवा के रूप में सियाचिन में सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान में पहली महिला अधिकारी को तैनात किया गया। फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स की अधिकारी कैप्टन शिवा चौहान सियाचिन ग्लेशियर और माइनस 40 डिग्री जैसी बर्फीली वादियों में पहली महिला सैन्य अधिकारी हैं। विगत जनवरी में भारतीय सेना के फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट कर बताया था कि कैप्टन शिवा दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र कुमार पोस्ट में सक्रिय रूप से तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।

सियाचिन: 39 साल से ना'पाक' हरकतों की निगरानी!
कुमार पोस्ट में पोस्टिंग से पहले शिवा को कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। दरअसल, सियाचिन ग्लेशियर सबसे ऊंचा युद्ध का मैदान है, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच 1984 से रुक-रुक कर लड़ाईयां होती रही हैं। कुमार पोस्ट सियाचिन ग्लेशियर पर 15,632 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। सितंबर 2021 में विशेष रूप से विकलांग लोगों की एक टीम ने पहाड़ को बौना साबित करते हुए सफल चढ़ाई की और विश्व रिकॉर्ड भी बनाया।

सियाचिन के लिए कठिन ट्रेनिंग
भारतीय सेना ने कैप्टन शिवा की सियाचिन में तैनाती को उपलब्धि बताते हुए कहा कि उन्होंने कड़ी ट्रेनिंग ली। कैप्टन शिवा चौहान को कठिन परिस्थितियों में धीरज रखने का प्रशिक्षण, बर्फ की दीवार पर चढ़ने, हिमस्खलन और अचानक बनने वाली बर्फ की खाई (avalanche and crevasse) में बचाव और खुद को बचाए रखने के अभ्यास सहित कई कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। इसी साल 2 जनवरी को एक कठिन चढ़ाई के बाद उन्हें सियाचिन ग्लेशियर में शामिल किया गया था।

प्रधानमंत्री ने शिवा को 'नारी शक्ति' बताया
कैप्टन चौहान के नेतृत्व में सैपर्स की टीम को कई युद्ध इंजीनियरिंग कार्य करने होंगे। इस टीम को तीन महीने की अवधि के लिए पोस्ट पर तैनात किया जाएगा। सियाचिन पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी बनने पर कैप्टन शिवा चौहान को पीएम मोदी से भी सराहना मिली थी। प्रधानमंत्री ने फायर एंड फ्यूरी सैपर्स कॉर्प्स के एक ट्विटर पोस्ट पर रिप्लाई किया था। उन्होंने कहा, कैप्टन शिवा की तैनाती भारत की नारी शक्ति की भावना को दर्शाते हुए, प्रत्येक भारतीय को गौरवान्वित करेगा।

किसी को फॉलो करना नहीं सीखा
कैप्टन शिवा के व्यक्तित्व के बारे में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया। इसके अनुसार 2015 की एक घटना को याद कर शिवा की बहन शुभम चौहान ने बताया था कि शिवा ने कभी फॉलोअर बनना नहीं सीखा। कंप्यूटर साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विषयों को छोड़ उसने बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) करने पर जोर दिया। 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाली शिवा अपने अटल फैसले के कारण ही इतिहास कायम में सक्षम हुई हैं।

11 साल की आयु में पिता का निधन
2021 में बंगाल सैपर की इंजीनियरिंग रेजिमेंट में कमीशन मिला। 25 वर्षीय कैप्टन चौहान का परिवार राजस्थान के उदयपुर जिले से ताल्लुक रखता है। महज 11 साल की आयु में पिता राजेंद्र सिंह चौहान को खोने वाली शिवा को मजबूत इरादों वाली 'आयरन लेडी' कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

बचपन में मां ने पैसों का हिसाब सिखाया
न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहीं बहन शुभम बताती हैं कि वे खुद भी सैन्य अधिकारी बनने की ख्वाहिश रखती थीं, एनसीसी का हिस्सा भी बनीं, लेकिन बाद में अपनी बहन को सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। मां हमेशा प्रतिष्ठित नौकरी के लिए प्रोत्साहित करती रहीं। कॉलेज के दिनों में मां ने बच्चों को खर्चा चलाना सिखाया।

इस टॉपर ने कभी खुद पर शक नहीं किया
शिवा ने कभी खुद पर शक नहीं किया। उनका प्रशिक्षण अक्टूबर में शुरू हुआ था। कुमार पोस्ट पहुंचने के बाद कैप्टन शिवा ने सबसे पहले मां को फोन किया था। उपलब्धियों को देखकर शिवा के टीचर्स का सीना भी गर्व से चौड़ा हुआ है। 2019 में सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की फाइनल परीक्षा पास करने वाली शिवा के शिक्षकों के अनुसार वे पूरे कॉलेज में टॉपर रही हैं।
नीचे देखिए वीरांगना कैप्टन शिवा की VIDEO
उठो, छलांग मारकर आकाश को छू लो...
कैप्टन शिवा की ट्रेनिंग और सियाचिन तक पहुंचने के प्रेरक सफर को दिखाने के लिए इंडियन आर्मी ने वीडियो शेयर की है। इसमें शिवा को दुर्गम इलाके में साइक्लिंग, कठिन चोटी पर चढ़ाई और कई दूसरे चैलेंजिंग एक्शन में देखा जा सकता है। इस मोटिवेशनल स्टोरी के आधार पर कहना गलत नहीं होगा कि कैप्टन शिवा की जर्नी सही मायने में हर भारतीय खास तौर पर नारी शक्ति की आंखें खोलने वाला है।












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