किराना व्यापारी की बेटी का संघर्ष, दो प्रयास में नहीं बनीं IAS तो बदल डाली रणनीति, फिर तीसरे में कर दिया कमाल
Ayushi Jain IAS: हम सभी इस कहावत से परिचित हैं कि जहां चाह, वहां राह। इसका जीता जागता उदाहरण हैं यूपीएससी आकांक्षी आयुषी जैन। राजस्थान के झालावाड़ जिले के एक छोटे से शहर से आने वाली वह इस प्रतिष्ठित परीक्षा को एक बार नहीं, बल्कि दो बार पास करने में सफल रही है। उनके परिवार या आस-पड़ोस में यूपीएससी परीक्षा को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं है और इसके बावजूद वह परीक्षा पास करने में सफल रहीं।
2022 में यूपीएससी परिणाम जारी होने के बाद से कई प्रेरक कहानियां सुर्खियों में आई हैं। कई उम्मीदवार आईपीएस और आईआरएस जैसे पद हासिल करने के बाद भी आईएएस अधिकारी बनने की इच्छा रखते हैं। यही हाल आयुषी जैन का भी था जिन्होंने आईपीएस की ट्रेनिंग के दौरान यूपीएससी की तैयारी की। नीचे पढ़ें आयुषी के कठिन संघर्ष के बारे में...

किराना व्यापारी की बेटी हैं आयुषी जैन
यह जानकर भी हैरानी होगी कि आयुषी जैन के पिता अजीत कुमार जैन एक किराना व्यापारी हैं, जबकि उनकी मां हंसा जैन एक गृहिणी हैं। वह बचपन से ही बेहद अच्छी छात्रा रही हैं। भानपुरा के कमला सकलेचा स्कूल से 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 11वीं-12वीं के लिए कोटा चली गईं। बाद में आयुषी जैन ने जबलपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
तीसरे प्रयास में बनीं आईएएस
आयुषी जैन ने यूपीएससी परीक्षा के लिए 4 साल तक सेल्फ स्टडी की। दो प्रयासों और दो साक्षात्कारों के बाद वह आईपीएस अधिकारी बन गईं। हालांकि, वह हमेशा एक आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं। हैदराबाद में पुलिस सेवा में अपने प्रशिक्षण के दौरान, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार, उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी रिजल्ट 2022 के बाद वह आईएएस अधिकारी बन गईं।
तीसरे अटेंप्ट में बदल दी रणनीति और बन गईं IAS अधिकारी
2019 में तीसरे अटेंप्ट में प्रीलिम्स पास करने के बाद उन्होंने अपना वैकल्पिक विषय मैथ से एंथ्रोपोलॉजी में बदल लिया था। वैकल्पिक विषय बदलने से उनकी परफॉर्मेंस और तैयारी पर फर्क पड़ा। उन्होंने पहले दोनों प्रयासों में की गईं गलतियों से सबक लिया और नई रणनीति बनाई। यूपीएससी प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू, तीनों में ही उनकी न्यूजपेपर रीडिंग हैबिट से काफी फायदा मिला। साल 2019 में हुई यूपीएससी परीक्षा में 41वीं रैंक के साथ वह आईएएस अधिकारी बन गईं।












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