राहुल भाई, तुम्हारी तरह छुट्टी मनाने चला जाता तो सीएम आवास की जगह सैफई जाकर खेती करनी पड़ती

शादी के बाद पता चलेगा कि देवरानी को टिकट देने पर जेठानी क्या-क्या ताने देती है। परिवार की खातिर मुझे बीवी से कितनी ताने सुनने पड़े हैं, ये क्या बताऊं राहुल भाई...

नई दिल्ली। राहुल गांधी और अखिलेश यादव साथ आ गए हैं। दोनों ने साथ में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है लेकिन कई बातें हैं, जो दोनों को परेशान करती रहती हैं। राहुल गांधी को जो सवाल परेशान करते हैं, वो अखिलेश से पूछने चले जाते हैं। अब राहुल बाब और अखिलेश भैया की एक ऐसी ही मुलाकात की बातें हमने सुनी हैं। राहुल अपनी बात अखिलेश से कह रहे हैं और अखिलेश मुस्कुरा-मुस्कुरा कर अपने जवाबों से राहुल को मुतमईन करने की कोशिश में हैं।

राहुल भाई, मैं छुट्टी नहीं मनाता हूं.. आप बस मेरी बात मानिए

राहुल- तमाम मुश्किलों के बाद आखिर हम साथ आ ही गए अखिलेश भाई..

अखिलेश- हां बिल्कुल... जबसे तुमने कहा था कि 'अखिलेश अच्छा लड़का है' मैं तो तभी समझ गया था..

राहुल- भैया, लोग तो हमें साथ देखकर बहुत खुश हैं लेकिन मेरी पार्टी...

अखिलेश- अरे भाई पार्टी को क्या हुआ अब..

राहुल- भैया... दरअसल मैं पार्टी के लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि सबठीक होगा लेकिन कुछ लोग पता नहीं कैसी-कैसी बातें कर रहे हैं।

अखिलेश- कैसी बात कर रहे हैं?

राहुल- यही कह रहे हैं कि जो आदमी अपने ही परिवार का..... आप समझ रहे हैं ना?

अखिलेश- अरे सब दुष्प्रचार है। परिवार का ख्याल मुझसे ज्यादा आजतक किस नेता के बेटे ने रखा है भला, कोई बताए? पिता तो पिता होता है, बेटे के चक्कर में खुद काम करता रहता है... मैंने अपने पिता से कहा कि नहीं... आप की उम्र हो गई है मैं संभालूंगा काम। मैंने घर पर उनकी सुख-सुविधा के सारे इंतजाम कराए और काम खुद संभाला।

राहुल- भैया बात तो ठीक है लेकिन... शिवपाल जी भी तो..

अखिलेश- शिवपाल चाचा..... कभी उनसे पूछ लेना कि मुझे कितना चााहते हैं वो? कसम से.... तरीके से बताएंगे तुम्हे...

राहुल- वो कुछ लोग कह रहे हैं कि चाचा को किनारे लगा दिया है अखिलेश ने और पार्टी पर खुद कब्जा..

अखिलेश- अरे जाओ राहुल बाबा... चाचा को भी टिकट दिया है और छोटे भाई की बीवी को भी... शादी हुई होती तुम्हारी तो पता चलता कि देवरानी को टिकट देने पर उसकी जेठानी ने क्या-क्या ताने दिए हैं हमें. फिर भी मैं हूं कि परिवार के लिए बीवी से भी ताने सुने... क्या बताऊं राहुल भाई..... डिंपल ने दो दिन तक सीधे मुंह खाना तक नहीं दिया हमें। फिर जब मैंने बताया कि अपर्णा को रीता बहुगुणा के सामने टिकट दिया है, तब जाकर डिंपल का 'डिंपल' वाला चेहरा देखना नसीब हुआ।

राहुल- बताओ भाई.. तुम इतनी मेहनत करते हो पार्टी के लिए....

अखिलेश- हां जी भाई... करनी पड़ती है। तुम्हारी तरह मैं छुट्टी मनाने चला जाता तो मुख्यमंत्री आवास की जगह सैफई जाकर खेती करनी पड़ती। 24 घंटे काम है ये बाबा..

राहुल- ठीक है भैया.. मुझे तो जहां भी कहोगे मैं चल दूंगा आपके साथ.. ये राजनीति-वाजनीति में मेरी जानकारी ज्यादा नहीं है।

अखिलेश- हां, तो ठीक है ना.. मैं संभाल लूंगा चुनाव को। आप ज्यादा दिमाग मत लगाओ... भाई के साथ क्या किया और चाचा के साथ क्या किया....? ये सब सोचने की जरूरत नहीं है। आपका भाई तो खुद भाजपा से सांसद है। उसका क्या??

राहुल- भैया, छोड़िए.. आप तो बुरा मान रहे हो...

अखिलेश- अरे आप बात ही ऐसी कर रहे हैं। खैर, छोड़िए... और बताइए क्या चल रहा है?

राहुल- बस भैया बिजली का ध्यान रखिएगा कि कहीं आ ना जाए.... बस की छत पर चढ़कर प्रचार हो रहा है और तार छत पर झूलते रहते हैं.. किसी दिन कहीं...

अखिलेश- अरे बड़ी फिक्र करते हो तुम तो... तुम मुस्कुराए राहुल भाई तो तुम्हारे गालों पर डिंपल देखकर डिंपल याद आ गई... आओ चलो, डिंपल ने चाय बना रखी होगी।

राहुल- हां भैया, चलिए.. भाभी के हाथ की चाय भी बड़ी कमाल होती है।

अखिलेश- हां, वो तो है... लेकिन आप से एक शिकायत है।

राहुल- वो क्या??

अखिलेश- राहुल बाबा...... शिकायत ये है कि कब तक हम ही तुम्हें तुम्हारी भाभी से चाय पिलावाते रहेंगे... अब हमें भी भाभी के हाथ की चाय पिलाइए.. मुस्कुरा रहे हैं आप, इसका मतलब क्या समझूं??? मतलब बहुत जल्दी.. मैरा यार बना है दूल्हा... हूं ?????????

(यह एक व्यंग्य लेख है)

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