क्या है 'अर्बन स्पाइन क्राइसिस'? जिससे जूझ रहा 65% युवा, एक्सपर्ट ने बताया इस दर्द से कैसे निकलें
What is Urban Spine Crisis: 20 से 30 साल के युवा आजकल गर्दन में अकड़न और कमर दर्द से परेशान रहता है। क्योंकि आज का युवा कॉर्पोरेट में काम करता है। ये समस्या अब उनके साथ ही देखने को मिलती है। अब वह युवाओं में ये समस्या आम होती जा रही है। क्योंकि आजकल का ऑफिस कल्चर कुछ ऐसा बन गया है। लंबे घंटों तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, दिनभर वर्चुअल मीटिंग्स और शारीरिक गतिविधि की कमी इसका बड़ा कारण है।
इसे हम "अर्बन स्पाइन क्राइसिस" कह सकते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि समस्या अब दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अगर ऑफिस से छुटकारा मिलता भी है तो मोबाइल और ओटीटी प्लेटफॉर्म का नशा जोड़ दीजिए। इससे भी "अर्बन स्पाइन क्राइसिस" बढ़ती जा रही है। पीठ और गर्दन की बीमारियां अब 40-50 की उम्र में नहीं, बल्कि 25-30 की उम्र में ही शुरू हो रही हैं।

एक रिसर्च के मुताबिक, प्रोफेशनल्स को बार-बार पीठ या गर्दन में दर्द होता है। पहले यह आंकड़ा केवल उम्रदराज लोगों से जुड़ा होता था। आज की टेक्नोलॉजी काम को आसान बनाती है, लेकिन हमारे शरीर पर भारी पड़ रही है। लैपटॉप या फोन पर झुककर काम करना रीढ़ की हड्डी पर बहुत दबाव डालता है। कम चलना-फिरना मांसपेशियों को कमजोर करता है और बढ़ता तनाव हालत और बिगाड़ देता है। शुरुआत में लोग मामूली लक्षण जैसे गर्दन का अकड़ना, हाथ में झनझनाहट या हल्का दर्द नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही छोटी दिक्कतें आगे चलकर बड़ी बीमारियों का रूप ले लेती हैं।
ज्यादातर लोग दर्द होने पर बस पेनकिलर ले लेते हैं या आराम कर लेते हैं। जिससे दर्द तो कुछ समय के लिए चला जाता है, लेकिन ये इसका परमानेंट इलाज नहीं होता है। इसका समाधान फिजियोथेरेपी हो सकती है। फिजियोथेरेपी में शारीरिक व्यायाम, पॉश्चर सुधारना और चलने-फिरने की तकनीक शामिल होती है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और दर्द को दोबारा होने से रोकता है। लेकिन आमतौर पर लोग इसे तब अपनाते हैं जब स्थिति बहुत बिगड़ चुकी होती है।
एक्सपर्ट जीवन कासरा Steris Healthcare के मुताबिक, आजकल हम 30 साल की उम्र में ही गंभीर पीठ के रोग देख रहे हैं। घंटों बैठना, तनाव और मोबाइल-लैपटॉप का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हमारी रीढ़ को समय से पहले खराब कर रहा है। फिजियोथेरेपी सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि शरीर को मजबूत और सही बनाए रखने का तरीका है। हम भी युवाओं को यही समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मामले में तुरंत कदम उठाएं। इससे पहले कि मामूली अकड़न गंभीर दर्द बन जाए।"
यह रीढ़ की समस्या हमें सोचने पर मजबूर कर रही है कि असली "हेल्थ" क्या है? सिर्फ फिटनेस बैंड पहन लेना या हफ्ते में 3 दिन जिम जाना काफी नहीं है। रोजाना स्ट्रेचिंग, सही तरीके से बैठना और समय-समय पर फिजियोथेरेपी को अपनाना जरूरी












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