कंजूस पति ने लिखी अपनी पत्नी को कविता..

प्रिय क्यूं तुम नए-नए सूट सिलाती हो !
पुरानी साड़ी में भी तुम अप्सरा सी नजर आती हो !
इन ब्यूटी पार्लरों के चक्करों में ना पड़ा करो !
अपने चांद से चेहरे को क्रीम पाउडर से यूँ ना ढका करो !
रेस्टोरेंट होटल के खाने में क्या रखा है !
तुम्हारे हाथों से बना घर का खाना,
इनसे लाख गुना अच्छा है !
इन सैर सपाटों में वो बात कहाँ तुम्हारे मायके जैसा
ऐशो-आराम कहाँ !
नौकरों से खिटपिट में, मत सेहत तुम अपनी खराब करो !
झाडू-पोछा लगा हल्का सा व्यायाम करो !
सोने-चांदी में मिलती अब सो सो खोट है !
तुम्हारी सुन्दरता ही 24 कैरेट प्योर गोल्ड है !
माया-माया मत किया कर पगली, यह तो महा ठगिनी है !
मेरे इस घर-आंगन की तो, तू ही असली धन लक्ष्मी है !!

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