राजनीति का पहला सबक
राजनीति का पहला सबक
नेता का बेटा अपने पिता से बोला, "पापा मुझे भी राजनीति में आना हैं, मुझे कुछ टिप्स दो।"
नेता: बेटा, राजनीति के तीन कठोर नियम होते हैं।
"चलो पहला नियम समझाता हूँ", यह कहकर नेता जी ने बेटे को छत पर भेज दिया और ख़ुद नीचे आकर खड़े हो गए।
नेता जी: छत से नीचे कूद जाओ।
बेटा" पापा, इतनी ऊंचाई से कुदूंगा तो हाथ पैर टूट जायेंगे।
नेता जी: बेझिझक कूद जा, मैं हूँ ना, पकड़ लूँगा।
लड़के ने हिम्मत की और कूद गया, पर नेताजी नीचे से हट गए।
बेटा धड़ाम से ओंधे मुंह गिरा और कराहते हुए बोला, "आपने तो कहा था मुझे पकड़ोगे, फिर हट क्यों गए?"
नेता जी: ये हैं पहला सबक "राजनीति में अपने बाप का भी भरोसा मत करो।"
एक ड्राईवर और महिला
एक महिला एक बच्चे को गोद में उठाये हुए बस में चढ़ी।
बस ड्राईवर ने उसके बच्चे कि तरफ देखा और कहा, "मैंने ऐसा बदसूरत बच्चा आज तक नहीं देखा।"
महिला ने कन्डक्टर को किराया पकड़ाया और पीछे जाकर सीट पर बैठ गयी।
उसे ड्राईवर की बात का बुरा लगा था, इसलिए वह थोड़ी उदास सी थी।
उसके साथ बैठे आदमी ने पूछ लिया कि, "बहनजी क्या बात है? आप कुछ परेशान लग रही है।"
महिला ने कहा, "अभी अभी ड्राईवर ने मेरी बेइज्जती की है।"
उस आदमी ने उसे सहानुभूति देते हुए कहा, "क्यों? वह तो जानता का नौकर है उसे इस प्रकार यात्रियों की बेइज्जती नहीं करनी चाहिए।"
महिला ने कहा, "आप ठीक कहते हैं, मुझे लगता है कि मुझे उसकी बदतमीजी का जवाब दे देना चाहिए जिससे मेरे मन को शांति मिले।"
उस आदमी ने कहा, "ये बहुत अच्छी बात कही आपने, आप जाईये और.......... इस बंदर को मुझे दीजिये।"












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