संता अस्पताल में
लेडी डॉक्टर : तुम रोज सुबह खड़े होकर औरतों को क्यों घूरते रहते हो?
संता: डॉक्टर साहिबा आपने ही तो बोर्ड पर लिख रखा है औरतों को देखने का समय सुबह 9 बजे से 11 बजे तक।
चोर (बन्दूक तानते हुए): "ज़िन्दगी चाहते हो तो अपना पर्स मेरे हवाले कर दो।"
संता : "यह लो।"
चोर: " कितने मुर्ख हो तुम, मेरी बंदुक मे तो गोली ही नही थी। हा..हा...हा।"
सता : " और मेरे पर्स मे भी कहां रुपये थे
संता: "क्या बताऊ पापा, सामने वाले मकान मे एक लडकी हर रोज़ खिडकी मे से रुमाल हिलाती है पर खिडकी का शिशा कभी नही खोलती।"
पिता : बहको मत बेटे, वह तुझे देख कर रुमाल नही हिलाती । दर असल वह इस मकान की नौकरानी है जो रोज़ खिडकी के शिशे साफ करती है।













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