Fact Check: नए संसद भवन के लिए टाटा कंपनी ने सरकार से लिया सिर्फ एक रुपया? जानें सच
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि नए संसद भवन के लिए टाटा कंपनी ने सरकार से लिया सिर्फ एक रुपया लिया है। क्या है सच्चाई जानिए।

Fact Check News: देश का नया संसद भवन जल्द बनकर तैयार होने वाला है। हाल ही में 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्माणाधीन नए संसद भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लोगों से भी बात की। इन सब के बीच सोशल मीडिया पर नए संसद भवन को बनाने को लेकर दावा किया जा रहा है कि टाटा ग्रुप ने सरकार से महज एक रुपया लिया है। ऐसे में क्या है सच्चाई जानिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, ट्विटर पर कई लोग पीएम मोदी की नए संसद भवन के अंदर की तस्वीरों को साझा करते हुए दावा कर रहे हैं कि देश का नया संसद भवन 17 महीनों में बन कर तैयार हो चुका है। इसी के साथ आगे कहा है कि इसे बनाने के लिए टाटा कंपनी ने मोदी सरकार से सिर्फ एक रुपया लिया है।

वायरल पोस्ट में पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ लिखा, "नया संसद भवन, दो नए रिकॉर्ड। इसे महज 17 महीनों में बनाया गया था। टाटा ने इसे भुनाया और सरकार को लागत के रुप में केवल एक रुपये। यह टाटा की देश को देन है।
लेकिन जब हमने इस दावे की सच्चाई की पड़ताल की तो पता लगा है कि टाटा कंपनी एक रुपया लेकर नए संसद भवन को नहीं बना रहा है। बता दें कि टाटा ग्रुप ने साल 2020 में 861.9 करोड़ रुपए की बोली लगाकर नए संसद भवन निर्माण का टेंडर हासिल किया था। इतना ही नहीं अभी तक संसद भवन का काम भी पूरा नहीं हुआ है।
सितंबर 2020 में कई रिपोर्ट्स में बताया गया था कि टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने 861.9 करोड़ रुपये की लागत से एक नया संसद भवन बनाने का ठेका हासिल किया है। मिंट की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने नए भवन के निर्माण के लिए वित्तीय बोली खोली थी, जिसे टाटा ने जीता था।

Fact Check
दावा
दावा किया जा रहा है कि नए संसद भवन के लिए टाटा ने एक रुपया लिया है।
नतीजा
दावा पूरी तरह से झूठा है। टाटा ग्रुप ने साल 2020 में 861.9 करोड़ रुपए की बोली लगाकर नए संसद भवन निर्माण का टेंडर हासिल किया












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