Fact Check: 11 साल की बच्ची कह रही 'मैं हूं Parle-G गर्ल', मेरा हुआ पुनर्जन्म, जानें वायरल दावे का सच
Parle-G Girl Fact Check: 11 साल की एक बच्ची ने ऐसा दावा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। उसका कहना है कि पार्ले-जी बिस्किट के पैकेट पर जो लड़की दिखाई देती है, वो वही है। उसके पिछले जन्म की तस्वीर! यह अजीबोगरीब दावा लोगों को चौंका रहा है। वनइंडिया हिंदी की फैक्ट चेक रिपोर्ट में यह दावा फर्जी निकला है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए बच्ची व उसका परिवार पार्ले जी जैसे बिस्किट ब्रांड के नाम पर अफवाह फैला रहा है। यह दावा पूरी तरह से निराधार और वायरल होने के लिए फैलाया गया एक भ्रम मात्र है, जिसकी पुष्टि वनइंडिया हिंदी की टीम के फैक्ट चेक में हुई है।

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बच्ची दावा कर रही है कि पार्ले-जी के रैपर वाली 'मासूम मुस्कान' फिर से जन्म ले चुकी है। पार्ले-जी बिस्किट कंपनी ने उसके पहले वाले जन्म की तस्वीर इस्तेमाल की थी, जिसके बदले उसे कुछ भी नहीं दिया गया। वह चाहती है कि कंपनी उसके परिवार की आर्थिक मदद करे। बच्ची के इंटरव्यू वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं।
पूरा मामला यह है कि बिहार की बताई जा रही महिला प्रिया शर्मा और उसकी दो बेटियां, गुडिया और 'पार्ले जी', हाथ में पार्ले-जी का बड़ा पैकेट लेकर लगातार इंटरव्यू दे रही हैं। पार्ले जी वाली फोटो का दावा करने वाली बच्ची का नाम ही 'पार्ले जी' रख दिया गया है।

छह साल की उम्र में खींची तस्वीर
पार्ले जी की फोटो पर दावा करने वाली बच्ची की उम्र महज 11 साल है। उसका कहना है कि जब वह छह माह उम्र की थी तब किसी ने उसकी एक फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी, जिसे पार्ले जी कंपनी ने बिस्किट के रैपर पर इस्तेमाल कर लिया। जब इंटरव्यू लेने वालों ने बच्ची को बताया गया कि यह फोटो तो उसके जन्म से भी पहले से ही रैपर पर है, तो उसने पुनर्जन्म की नई कहानी सुनानी शुरू कर दी।

बच्ची के दोनों दावों की सच्चाई?
दावा नंबर एक की हकीकत: चेहरे व बालों के आधार पर 'पार्ले जी' के रैपर वाली तस्वीर को खुद की बताते हुए बच्ची कह रही है कि बचपन में उसके बाल पार्ले जी गर्ल जैसे थे। शक्ल भी मिलती थी। छह माह की उम्र में फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर डाली गई थी, जिसे पार्ले जी कंपनी ने इस्तेमाल कर लिया। जबकि हकीकत यह है कि पार्ले जी बिस्किट पर यह फोटो तब से है जब सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म व इंटरनेट था ही नहीं।
दावा नंबर दो की हकीकत: लड़की कहती है कि उसका पुनर्जन्म हुआ है। मतलब कि पार्ले जी के रैपर वाली लड़की का निधन हो गया और अब वह दावा करने वाली लड़की के रूप में बिहार में फिर से पैदा हुई है, जबकि हकीकत यह है कि पार्ले जी वाली लड़की वाली फोटो जिन महिलाओं की फोटो होने का दावा किया जाता रहा है, वे तीनों अभी जिंदा हैं।

Who is Parle G Girl: पार्ले जी गर्ल कौन है?
हमें पड़ताल में पता चला कि पार्ले जी के कवर पर पहले गाय और गवालन की तस्वीर हुआ करती थी। बाद में इसे बदलकर एक छोटी बच्ची की तस्वीर लगा दी गई और रैपर का कलर भी सफेद से पीला कर दिया गया।
पार्ले जी कवर वाली तस्वीर को लेकर अक्सर बहस होती रही है। नीरू देशपांडे, सुधा मूर्ति और गुंजन गंडानिया नाम की तीन महिलाओं के यह बच्ची होने का दावा किया जाता रहा है। मीडिया की खबरों में तीनों में से नागपुर की नीरू देशपांडे को यह बच्ची माना गया।
पार्ले जी वाली लड़की सिर्फ पेंटिंग है
पार्ले जी वाली लड़की को लेकर काफी साल पहले ही खुद Parle-G की ओर से स्पष्ट किया जा चुका है कि यह किसी भी लड़की के बचपन की तस्वीर नहीं बल्कि एक पेंटिंग है।
6 साल पहले दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार, पार्ले प्रोडक्ट्स ग्रुप के प्रोडक्ट मैनेजर मयंक शाह पुष्टि कर चुके हैं कि पार्ले बिस्किट रैपर वाली बच्ची सिर्फ एक इलेस्ट्रेशन है, जिसे 60 के दशक में एवरेस्ट क्रिएटिव द्वारा बनाया गया था।

पार्ले जी कंपनी की सफलता की पूरी टाइमलाइन
1928-30: श्री मोहनलाल दयाल ने 1928 में मुंबई के विले पार्ले में पार्ले हाउस की स्थापना की थी। पहली फैक्ट्री 1929 में स्थापित की गई थी, जिसमें केवल 12 लोग मिष्ठान्न बनाते थे।
1931-40: पार्ले-जी और मोनाको का जन्म। साल 1939 में पार्ले हाउस ने अपना पहला बिस्किट बनाया, जिसका नाम पारले ग्लूको था। उसी वर्ष भारत का पहला नमकीन क्रैकर, मोनाको भी पेश किया गया।
1941-50: प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरे और भारत का सबसे लम्बा ओवन बनाया, जो 250 फीट लम्बा था।
1951-60: साल 1956 में चीज़लिंग्स के शुभारम्भ के साथ, देश को पनीर स्नैक्स का आनंद लेने का एक नया तरीका मिला।
1961-65: पार्ले बहुत अधिक मीठा हो गया। साल 1963 में किस्मी और 1966 में पॉपिन्स के साथ कन्फेक्शनरी रेंज का विस्तार हुआ।
1966-70: जेफ़्स लॉन्च किए गए। नमकीन स्नैक्स के प्रशंसकों के लिए पार्ले जेफ्स बनाया गया।
1971: विश्व पर विजय! पार्ले को अपना पहला मोंडे चयन पुरस्कार 1971 में प्राप्त हुआ।
1972-80: थोड़ा मीठा, थोड़ा नमकीन। 1972 में मूल मीठा और नमकीन बिस्किट, क्रैकजैक पेश किया गया।
1981-85: पार्ले ग्लूको का नाम बदलकर पार्ले-जी कर दिया गया, जहां "जी" का मतलब ग्लूको था।
1986-90: टॉफियों और कैंडीज़ की विस्तृत श्रृंखला। साल 1983 में चॉकलेटी मेलोडी और 1986 में भारत की पहली आम कैंडी मैंगो बाइट लॉन्च की गई।
1991-2000: थोड़ी सी लापरवाही बहुत काम आती है। भारत के सबसे पसंदीदा मोल्डेड चॉकलेट चिप बिस्कुट, हाइड एंड सीक, 1996 में पेश किए गए।
2000: पार्ले ने 20-20 बटर कुकीज और मैगिक्स लॉन्च किया। काजू और मक्खन की मिठास से भरपूर पारले 20-20 घर-घर की पसंदीदा कुकी बनी।
2011: पार्ले ने कई उत्पाद नवाचारों का नेतृत्व किया और पारले प्लेटिना का अनावरण किया।
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Fact Check
दावा
पार्ले जी बिस्किट रैपर पर बच्ची की फोटो खुद की फोटो होने का दावा।
नतीजा
यह दावा पूरी तरह से निराधार और वायरल होने के लिए फैलाया गया एक भ्रम मात्र है












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