क्या सच में भारत ने मांगी इमरान खान की कस्टडी? 'टॉप सीक्रेट' लेटर पर सरकार ने PAK को किया एक्सपोज
PIB Fact Check: सोशल मीडिया पर पाकिस्तान-आधारित कई प्रोपेगेंडा अकाउंट एक तथाकथित 'टॉप-सीक्रेट' सरकारी दस्तावेज को प्रसारित कर रहे हैं। यह पत्र भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) का बताया जा रहा है। दावा किया गया है कि इस पत्र में भारत सरकार ने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को एक राजनीतिक कैदी के रूप में भारत को सौंपा जाए।
इस मनगढ़ंत और फैब्रिकेटेड पत्र में यह झूठा दावा किया गया है कि भारत सरकार ने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि इमरान खान को एक राजनीतिक कैदी के रूप में भारत भेजा जाए।

PIB Fact Check: PIB ने वायरल दावे का किया पर्दाफाश
पीआईबी के अनुसार, इस पत्र में किए गए सभी दावे झूठे, निराधार और तथ्यहीन हैं। यह सामग्री पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ चलाए जा रहे निरंतर भ्रामक सूचना अभियान (Ongoing Disinformation Campaign) का हिस्सा है। PIB Fact Check के अनुसार, भारत सरकार ने इमरान खान की कस्टडी के लिए कोई अनुरोध नहीं किया है।
PIB Fact Check: भारत सरकार की अपील
सरकार ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट सामग्री (Unconfirmed content) को शेयर न करें। सटीक जानकारी के लिए केवल भारत सरकार के आधिकारिक सोर्स पर ही विश्वास करें। यदि आपको भारत सरकार से संबंधित कोई भी संदिग्ध दस्तावेज़ मिलता है, तो उसे तुरंत @PIBFactCheck 'X' हैंडल पर, या निम्नलिखित माध्यमों से रिपोर्ट करें:
- फ़ोन/वॉट्सऐप: +918799711259
- ईमेल: [email protected]
क्या है इमरान खान का कानूनी मामला?
72 वर्षीय पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान विभिन्न भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में कैद हैं। उनकी पहली सजा 'तोशाखाना मामले' (Toshakhana Case) से जुड़ी थी, जिसमें उन पर पद पर रहते हुए मिले सरकारी गिफ्ट्स को कथित रूप से बेचने का आरोप था।
इसके अलावा, उन्हें एक राजनयिक केबल (Diplomatic Cable) लीक करने के आरोप में 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी। उन्हें 'अल-कादिर ट्रस्ट' (Al Qadir Trust) से जुड़े एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की सज़ा भी मिली, यह चैरिटी संगठन कथित रूप से अवैध भूमि सौदों में शामिल था। खान ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।

Fact Check
दावा
दावा किया जा रहा भारत सरकार ने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि इमरान खान को कैदी के रूप में भारत भेजा जाए।
नतीजा
यह दावा पूरी तरह से झूठा है।












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