Fact Check: रेलवे ट्रैक बम लगाते पकड़े गए युवकों का मुर्शिदाबाद हिंसा व RSS से नहीं संबंध, दावा फर्जी
Fact Check: वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के विरोध में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले हिंसा थमने के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दो युवक नीचे बैठे नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ये दोनों युवक मदन कुंडू और सागर दास पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रेलवे ट्रैक पर बम लगाते हुए पकड़े गए हैं और इनका संबंध आरएसएस (RSS) से है। वनइंडिया हिंदी के फैक्ट चेक में यह दावा फर्जी निकला है।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने एक्स (ट्विटर) पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "क्या ये भाजपा से संबंध रखते हैं? पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रेलवे लाइन के पास बम लगाते हुए पकड़े गए मदन कुंडू और सागर दास, पुलिस ने किया गिरफ्तार, बम हुआ बरामद।" इसी तरह के दावे अन्य कई सोशल मीडिया यूजर्स और कुछ कांग्रेस से जुड़े हैंडल्स द्वारा भी किए गए हैं।

सच्चाई क्या है?
वन इंडिया फैक्ट चेक टीम ने इस वायरल पोस्ट की पड़ताल की और पाया कि यह दावा भ्रामक है। हमने सबसे पहले वायरल तस्वीर को गूगल लेंस की मदद से रिवर्स सर्च किया। इस दौरान हमें दिसंबर 2024 की दो ट्वीट्स मिले- एक 'द रिपोर्ट हिंदी' का (28 दिसंबर 2024) और दूसरा 'Journo Mirror' नाम के अकाउंट से (29 दिसंबर 2024)। दोनों ट्वीट्स में बताया गया कि यह घटना दिसंबर महीने की है, न कि हाल की मुर्शिदाबाद हिंसा से जुड़ी।
आगे सर्च करने पर 27 दिसंबर 2024 की खास खबर डॉम कॉम वेबसाइट की रिपोर्ट मिली, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि मुर्शिदाबाद जिले के निमतिता रेलवे स्टेशन के पास दो युवक संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए गए।
स्थानीय लोगों ने दोनों को रेलवे ट्रैक पर कुछ संदिग्ध वस्तु रखते हुए देखा। पास जाकर जांच करने पर पता चला कि वह बम है। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई, और सूती थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया और बम को निष्क्रिय कर दिया गया।
क्या दोनों युवक किसी संगठन से जुड़े थे?
डॉम कॉम और अन्य किसी भी विश्वसनीय स्रोत में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि आरोपी किसी राजनीतिक या सामाजिक संगठन से जुड़े हुए हैं। चाहे वह आरएसएस हो या कोई और संगठन। इसलिए सोशल मीडिया पर जो दावा किया जा रहा है, वह सच्चाई से परे है और भ्रामक है।
मुर्शिदाबाद हिंसा की टाइमलाइन
8 अप्रैल 2025: वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में मुर्शिदाबाद जिले के उमरपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग 12 को प्रदर्शनकारियों ने अवरुद्ध किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में आग लगा दी और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं।
9 अप्रैल 2025: प्रदर्शनकारियों ने निमतिता रेलवे स्टेशन पर रेल सेवाओं में बाधा डाली और ट्रेनों पर पत्थर फेंके। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं और 22 लोगों को गिरफ्तार किया।
11 अप्रैल 2025: प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय सांसद खलीलुर रहमान के कार्यालय पर हमला किया और एक पुलिस जीप को आग के हवाले कर दिया।
हिंसा के दौरान दो हिंदू नागरिकों, हरगोबिंद दास और उनके बेटे चंदन दास की हत्या कर दी गई।
12 अप्रैल 2025: हिंसा में एक 17 वर्षीय युवक, इजाज अहमद शेख की गोली लगने से मृत्यु हो गई। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया, जिसके बाद बीएसएफ को तैनात किया गया।
13 अप्रैल 2025: हिंसा में अब तक कुल तीन लोगों की मृत्यु हो चुकी थी और 15 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 274 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और 60 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गईं।
14 अप्रैल 2025: हिंसा के कारण 400 से अधिक लोग, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे, अपने घरों से पलायन कर मालदा जिले में शरण लेने को मजबूर हुए।
18 अप्रैल 2025: राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस और राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया।
प्रमुख घटनाएं और प्रतिक्रियाएं
हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हिंदू समुदाय के घरों को निशाना बनाया और आगजनी की घटनाएं हुईं। बंगाल पुलिस को इनपुट मिले कि हिंसा में बांग्लादेशी संगठन और एसडीपीआई जैसे कट्टरपंथी समूहों की संलिप्तता हो सकती है। BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आश्वासन दिया कि वक्फ अधिनियम को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया जाएगा और शांति बनाए रखने की अपील की।
यह भी पढ़ें- Fact Check: मुर्शिदाबाद हिंसा के नाम पर राजस्थान का पुराना वीडियो वायरल, CM के इलाके में हुआ था जमीन का विवाद

Fact Check
दावा
रेलवे ट्रैक बम लगाते पकड़े गए दोनों युवकों का मुर्शिदाबाद हिंसा व RSS से संबंध बताया जा रहा।
नतीजा
घटना साल 2024 की है जबकि मुर्शिदाबाद हिंसा 2025 में हुई है। आरएसएस से संबंध भी नहीं।
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