FACT CHECK: क्या किसान आंदोलन में बूढ़ी औरत से पुलिस ने किया अमानवीय व्यवहार? जानिए सच
नई दिल्ली। बीते 26 जून को प्रदर्शनकारी किसान चंडीगढ़ में पुलिस से उस वक्त भिड़ गए जब वे राजभवन में एक ज्ञापन देने जा रहे थे। बैरिकेड्स तोड़कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अब इसे लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की और किसानों के समर्थन में बात की। कुछ ने छह पुलिसकर्मियों द्वारा एक बूढ़ी औरत को जबरन ले जाने की तस्वीरें साझा कीं और चंडीगढ़ पुलिस पर किसान विरोधी होने और नागरिकों के साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया।

लेकिन जब वायरल हो रही इस फोटो की सत्यता जांची गई तो पता चला कि ये फोटो 6 साल पुरानी है। यानी कि साल 2015 की। फैक्ट चेक में पाया गया कि 7 अगस्त 2015 में पंजाब के पटियाला में पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया था। किसान तब पंचायत की जमीन पर कब्जा करने के जिला प्रशासन के कदम के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। वायरल हो रही इस फोटो को उस वक्त हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने आर्टिकल में भी यूज किया था। रिवर्स ईमेज सर्च में ये फोटो The Tribune के एक आर्टिकल में पाया गया। जो साल 2015 में ही यूज किया गया था।
आपको बता दें कि किसान तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। ये कानून इस प्रकार हैं- पहला, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020। दूसरा, 'कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक', 2020 और तीसरा है 'आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020'। 26 जून को, किसानों ने बड़ी संख्या में कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने के लिए चंडीगढ़ में राज्यपाल के आवास की ओर मार्च किया था। कई न्यूज रिपोर्ट्स और विजुअल में देखा जा सकता है कि प्रोटेस्टर पंचकूला में बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ रहे हैं। मतलब साफ है कि 2015 की फोटो को हाल में चल रहे किसानों के प्रोटेस्ट का बताकर गलत दावे से शेयर किया जा रहा है।

Fact Check
दावा
Picture shows the conduct of Chandigarh police towards protesters during the ongoing farmers’ agitation.
नतीजा
The picture was taken in August 2015 in Punjab’s Patiala. Clashes had broken out when police tried to remove alleged encroachers on panchayat land.












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