फैक्ट चेक: असम मॉब लिंचिंग में क्या भीड़ ने मुस्लिम की पीट-पीटकर हत्या की? जानें सच
नई दिल्ली, जून 15: असम के तिनसुकिया जिले में शनिवार तड़के भीड़ ने गाय चोरी के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके तुरंत बाद, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि भारत में हिंदुत्व भीड़ द्वारा मुसलमानों को झूठे आरोपों फंसा कर उन्हें निशाना बना रही है। पत्रकार सीजे वेरलेमैन ने न्यूज पोर्टल "द वायर" के एक लेख का लिंक साझा करते हुए ट्वीट किया कि, असम में शनिवार की रात एक 28 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति को हिंदुत्व की भीड़ ने गाय चोरी के झूठे आरोप लगाकर पीट-पीट कर मार डाला।

वन इंडिया की फैक्ट चैक की टीम ने जब इस दावे की पड़ताल की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। ट्वीट में किया गया दावा भ्रामक है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना में पीड़ित हिंदू है। घटना की लगभग हर खबर में पीड़ित का नाम शरत मोरन बताया गया और उनमें से किसी ने भी यह नहीं कहा कि वह मुसलमान है। इस मामले में तिनसुकिया के पुलिस अधीक्षक देवजीत देवरी ने साफ किया कि, वह दावा झूठा है और पीड़िता असम के मोरन समुदाय से है। उन्होंने कहा कि घटना का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।
ईस्ट मोजो की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित को पुलिस ने तिनसुकिया के कोरजोंगा गांव से बचाया और अस्पताल लेकर गए थे। जहां उसने दम तोड़ दिया। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि शरत अपने एक दोस्त के यहां गया था जहां उसे गो तस्कर होने के शक में ग्रामीणों ने पकड़ लिया था। इसके बाद ग्रामीणों ने शरत को बुरी तरह पीटा जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने घटना के सिलसिले में 12 लोगों को हिरासत में लिया है। इससे साफ है कि सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। इस घटना में कोई भी सांप्रदायिक एंगल नहीं है। असम में पिछले कुछ वर्षों में मॉब लिंचिंग की बार-बार घटनाएं देखी गई हैं। 2017 में, मवेशी चोरी के संदेह में असम के नगांव जिले में भीड़ द्वारा दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

Fact Check
दावा
असम में शनिवार की रात एक 28 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति को हिंदुत्व की भीड़ ने गाय चोरी के झूठे आरोप लगाकर पीट-पीट कर मार डाला।
नतीजा
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। इस घटना में कोई भी सांप्रदायिक एंगल नहीं है।












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