Fact Check: 'रामलला' के लिए पत्थर देने वाले ठेकेदार पर कांग्रेस ने लगाया 80000 का जुर्माना, जानिए छिपी सच्चाई
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद से ही रामलला के दर्शनों के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है।
वहीं, भक्तों के सैलाब के साथ ही राम मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर थोक के भाव में कुछ ऐसी खबरें भी तेजी से फैल रही हैं, जिनकी हकीकत जानना भगवान राम के भक्तों के लिए बेहद जरूरी है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक ऐसी ही खबर में दावा किया जा रहा है कि अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति जिस पत्थर से बनी है, उसके लिए पत्थर को सप्लाई करने वाले कॉन्ट्रैक्टर श्रीनिवास नटराज पर कर्नाटक की मौजूदा कांग्रेस सरकार ने 80 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
दावे में ये भी कहा जा रहा है कि जुर्माना इसलिए लगाया गया, क्योंकि रामलला की मूर्ति के लिए ये पत्थर अवैध खनन करके हासिल किया गया। और, साथ ही दावा है कि भाजपा के सांसद प्रताप सिम्हा ने ये रकम अपनी जेब से देने का वादा किया है।
क्या है रामलला की प्रतिमा के लिए जुर्माने का सच?
तो क्या वाकई रामलला की मूर्ति के लिए इस्तेमाल किए गए पत्थर पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने जुर्माना लगाया है? सोशल मीडिया पर जो कुछ कहा जा रहा है कि कांग्रेस सरकार राम मंदिर की विरोधी है, उनमें कितनी सच्चाई है? भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा को लेकर जो खबर वायरल हो रही कि वो रामलला की मूर्ति के लिए कॉन्ट्रैक्टर के जुर्माने का भुगतान अपनी जेब से करेंगे, क्या वास्तव में ऐसा है? आइए जानते हैं इस दावे की सच्चाई...
जुर्माने का रामलला की मूर्ति से कोई लेना-देना नहीं
वनइंडिया के फैक्ट चेक में पाया गया कि इस दावे में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। अब आप कहेंगे कि फिर ये पूरी कहानी क्या है, तो हम आपको शुरुआत से ये पूरा मामला समझाते हैं। दरअसल, रामलला की प्रतिमा के लिए जिस पत्थर के अवैध खनन पर जुर्माने की बात कही जा रही है, वो मामला साल 2022 का है, जब कर्नाटक में भाजपा की सरकार थी और जुर्माने का रामलला की मूर्ति से कोई लेना-देना नहीं है।
समझिए, क्या है जुर्माने की पूरी कहानी
साल 2022 में, कर्नाटक के हारोहल्ली-गुज्जेगौदानपुरा गांव में 70 वर्षीय रामदास एच नाम के एक किसान ने अपनी 2.14 एकड़ खेती की जमीन को समतल कराने के लिए ठेकेदार श्रीनिवास नटराज को ठेका दिया। जमीन को समतल करने के दौरान खुदाई में श्रीनिवास को करीब 10 फीट की गहराई पर एक 'कृष्ण शिला' पत्थर मिला, जिसे उन्होंने तीन टुकड़ों में तोड़ा और बाहर निकाल लिया।
हालांकि, इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों की इसपर नजर पड़ी और उन्होंने माइंस एंड जियोलॉजी डिपार्टमेंट को खबर कर दी। विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने श्रीनिवास नटराज पर बिना आधिकारिक इजाजत लिए, इस पत्थर के खनन को लेकर 80 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। बेहद आर्थिक परेशानी के बीच श्रीनिवास ने वो जुर्माना भर दिया। यहां ये जानना बहुत जरूरी है कि उस समय तक रामलला की मूर्ति के लिए इस पत्थर का चयन नहीं हुआ था।
इसके बाद रामलला की मूर्ति के निर्माण के लिए मूर्तिकार अरुण योगीराज ने इस पत्थर को सेलेक्ट किया और 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में उनकी बनी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। जब ये घटना संज्ञान में आई तो मैसूर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रताप सिम्हा ने कहा कि जमीन से वो पत्थर निकालने वाले श्रीनिवास नटराज ने जुर्माना भरा है, वो रकम भाजपा उन्हें अपनी तरफ से देगी। इसके साथ ही जहां से ये पत्थर निकला, उस जमीन के मालिक ने भी कहा वो अपने खेत में एक राम मंदिर बनवाएंगे।
इस पूरे मामले को स्पष्ट करने के लिए, श्रीनिवास नटराज का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि 80 हजार रुपए का जो जुर्माना मैंने भरा था, उसका रामलला की प्रतिमा से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है। श्रीनिवास ने साफ किया कि उनके ऊपर जुलाई 2022 में लगा जुर्माना एक अलग घटना के लिए संबंधित विभाग ने लगाया था। श्रीनिवास ने साफ तौर पर बताया कि कर्नाटक सरकार द्वारा लगाए गए जुर्माने का राम की मूर्ति के लिए इस्तेमाल किए गए पत्थर से कोई संबंध नहीं है।

Fact Check
दावा
सोशल मीडिया पर दावा है कि अयोध्या में बनी रामलला की प्रतिमा के लिए जो पत्थर इस्तेमाल हुआ है, उसे देने वाले ठेकेदार पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 80 हजार का जुर्माना लगाया है।
नतीजा
अयोध्या में रामलला की प्रतिमा के लिए पत्थर देने वाले ठेकेदार को लेकर जो दावा किया जा रहा है, वो झूठ है।












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