धोपेश्वरनाथः अंगरेजों ने लगाई थी हनुमान प्रतिमा

मंदिर के महंत देवकी नन्दन जोशी के अनुसार यह धोपेश्वर नाथ मन्दिर अपने आप में एक इतिहास है। कहते हैं कि महाभारत काल में धूम्र ऋषि ने यहां आकर तपस्या की थी। घूम्र ऋषि अत्रि मुनी के शिष्य थे कहा जाता है कि तपस्या के बाद उनकी समाधि पर शिवलिंग की स्थापना कर दी गई तथा शिवलिंग को अर्द्धनारीश्वर की मान्यता प्राप्त है। इस मन्दिर का नाम धोपेश्वर नाथ भी धूम्र ऋषि के नाम पर ही रखा गया। लोग अब इसे धोपा के मन्दिर नाम से भी पुकारते है।
अंग्रेजों ने स्थापित की हनुमान प्रतिमा
यहां एक बहुत बड़ा पक्का तालाब भी है जिसकी सीढ़ियों को नवाब आसिफुद्दौला ने अपनी बेगम की मुराद पूरी होने पर पक्का कराया था । श्रवण मास के अतिरिक्त यहॉं शिवरात्रि पर विशेष मेला लगता है। मान्यता है कि यदि इस तालाब में भादो माह के शुक्ल पक्ष में गुरूवार को स्नान किया जाये तो शरीर में होने वाली बीमारियों से मुक्ति मिल जाती है। इसी मान्यता के चलते यहां हजारों की संख्या में लोग स्नान करते देखे जा सकते हैं।
यहॉं पर एक बड़ी हनुमान प्रतिमा भी है जो स्वयं में अदभुत है क्योंकि यह मूर्ति पूरी तरह से मिट्टी की बनी हुई है जिसको किसी समय मे अंग्रेजों की काली पलटन द्वारा स्थापित किया गया था।
हैरत की बात है कि जहां आए दिन धार्मिक नेता धर्मस्थलों से जुडे़ विवादित मामलों को उठाकर माहौल को खराब करने में जुटे रहते हैं, इस तरह के सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल देने वाले उदाहरणों को साजिशन भुलाया जा रहा है।
यह आलेख दैट्स हिन्दी और अजमेरा मीडिया इंस्टीट्यूट, बरेली के साझा मीडिया पार्टनरशिप कार्यक्रम के तहत प्रकाशित












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