रामायण के ‘अंगद’ आखिर कहां हैं? कभी रावण का दरबार हिला दिया था, आज गुमनामी में जी रहे बशीर खान की अनकही कहानी
Ramayan Angad (Who is Bashir Khan): टीवी इतिहास के सबसे चर्चित धारावाहिकों में शुमार रामायण ने 80 और 90 के दशक में लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। जब यह शो कोविड काल में दोबारा प्रसारित हुआ, तो नई पीढ़ी ने भी इसे उतने ही उत्साह से देखा। राम, सीता और लक्ष्मण की तरह कई अन्य किरदार भी घर-घर में पहचाने जाने लगे। उन्हीं में एक नाम था अंगद का, जिसे निभाया था अभिनेता बशीर खान ने।
अंगद का किरदार आज भी उस ऐतिहासिक दृश्य के लिए याद किया जाता है, जब वह रावण के दरबार में पैर जमा कर खड़े हो जाते हैं और कोई उन्हें हिला नहीं पाता। यह दृश्य केवल अभिनय नहीं, बल्कि दृढ़ता और आत्मविश्वास की मिसाल बन गया। कोविड के दौरान जब यह एपिसोड फिर से प्रसारित हुआ, तो सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हुई। अब फिर से अंगद की चर्चा हो रही है। असल में बशीर खान को कई सालों से पर्दे पर और सोशल मीडिया पर कहीं नहीं देखा गया है।

कहां और किस हाल में हैं बशीर खान?
आज बशीर खान किस शहर में हैं, क्या कर रहे हैं और उनकी मौजूदा जिंदगी कैसी है-इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आती। ना ही रामायण के किसी को-एक्टर ने उनकी स्थिति के बार में चर्चा की है। समय के साथ वे लाइमलाइट से पूरी तरह दूर हो गए हैं। हालांकि, दर्शकों की यादों में उनका 'अंगद' आज भी उतना ही मजबूत और अडिग खड़ा है। सोशल मीडिया पर जब भी रामायण की चर्चा होती है, उनका नाम जरूर सामने आता है। फैन्स अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वे एक दिन अचानक स्क्रीन पर लौटकर सबको चौंका देंगे। सच तो यह है कि इतने दमदार कलाकार का यूं गुमनामी में खो जाना कई लोगों को भावुक कर देता है।
पूर्व क्रिकेटर Virender Sehwag ने भी अंगद के उसी दृश्य की तस्वीर साझा करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा था कि उनकी बल्लेबाजी की प्रेरणा यहीं से मिली-"पैर हिलाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।" इसके बाद एक बार फिर बशीर खान सुर्खियों में आ गए।
कौन हैं बशीर खान? (Bashir Khan Biography)
बशीर खान ने अपने करियर की शुरुआत विक्रम बेताल से की थी। हालांकि असली पहचान उन्हें रामानंद सागर के शो रामायण में अंगद के रूप में मिली। उन्होंने किष्किंधा के राजा बाली और तारा के पुत्र अंगद का किरदार निभाया, जो राम सेना के प्रमुख योद्धाओं में से एक थे।
रामायण के अलावा उन्होंने महाभारत (1988) में सात्यकी और परशुराम जैसे किरदार निभाए। साथ ही श्री कृष्ण (1993) में भौमासुर की भूमिका में भी नजर आए। पौराणिक धारावाहिकों में उनकी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें एक अलग पहचान दी।
फिर क्यों छा गई खामोशी?
इतनी लोकप्रियता के बावजूद बशीर खान को वैसी भूमिकाएं नहीं मिलीं, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वे अच्छे प्रोजेक्ट की तलाश में थे, लेकिन मजबूत ब्रेक नहीं मिल पाया। धीरे-धीरे वे इंडस्ट्री से दूर होते गए और परदे से गायब हो गए।
आज उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि समय-समय पर सोशल मीडिया पर यह सवाल उठता है-आखिर रामायण के अंगद कहां हैं?
गुमनामी में भी जिंदा है पहचान
बशीर खान भले ही आज सुर्खियों से दूर हों, लेकिन अंगद का किरदार अब भी दर्शकों की यादों में जिंदा है। टीवी के स्वर्णिम दौर के इस कलाकार को लोग आज भी उसी अडिग मुद्रा में याद करते हैं, जब उन्होंने रावण के दरबार में अपना पैर जमाया था।
एक सच्चाई यह भी है कि मनोरंजन जगत में शोहरत जितनी जल्दी मिलती है, उतनी ही तेजी से छिन भी जाती है। लेकिन कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो कलाकार को अमर कर देते हैं। अंगद उन्हीं में से एक है, और बशीर खान का नाम उस इतिहास का हिस्सा बन चुका है।












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