जानें Vikas Divyakirti की कहानी, कभी फैमिली प्रेशर में शुरू की थी IAS की तैयारी, आज हैं युवाओं के लिए प्रेरणा
विकास दिव्यकीर्ति देश के जाने माने ट्यूटर्स, लेखक और देश के सबसे प्रशंसित करियर कॉउंसलर्स में से एक हैं। उनके द्वारा स्थापित 'दृष्टि IAS' देश के टॉप यूपीएससी के कोचिंग संस्थानों में से है। हर साल इस कोचिंग संस्थान से देश के प्रसिद्ध आईएएस-आईपीएस निकलते हैं।
बीते कुछ समय से विकास दिव्यकीर्ति '12वीं पास' फिल्म को लेकर चर्चाओं में हैं। आईपीएस मनोज शर्मा के जीवन से प्रेरित इस फिल्म में विकास दिव्यकीर्ति ने अपना ही किरदार निभाया है। दरअसल, मनोज शर्मा ने विकास दिव्यकीर्ति के पास यूपीएससी की तैयारी की थी। आइए आज आपको बताते हैं दूसरों के करियर को पॉलिश करने वाले विकास दिव्यकीर्ति के खुद के जीवन के बारे में...

पारिवारीक बैकग्राउंड
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जन्म 26 दिसंबर 1973 को हरियाणा के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पिता महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध प्रोफेसर थे, जबकि मां भिवानी के एक स्कूल में पीजीटी शिक्षिका थीं।
रिपोर्ट्स की मानें तो विकास दिव्यकीर्ति तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके सबसे बड़े भाई अमेरिका में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनके दूसरे भाई सीबीआई में डीआइजी हैं। विकास दिव्यकीर्ति के बारे में ये सारी जानकारी काफी आम है। हालांकि, हर किसी को उनके और उनके जीवन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण चीजें जाननी चाहिए क्योंकि यह आपको अत्यधिक प्रेरणा देगा।
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शैक्षणिक योग्यता
प्रोफेसर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हरियाणा के भिवानी जिले के सरस्वती शिशु मंदिर में पाई। ग्रेजुएशन के लिए उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में एडमिशन लिया, जहां से उन्होंने हिंदी भाषा में बीए की पढ़ाई पूरी की। इसके अलावा, उन्होंने एमए, एमफिल और पीएचडी भी की है क्योंकि उन्हें इस विषयों में काफी रूचि थी।
इतना ही नहीं, विकास दिव्यकीर्ति के पास अंग्रेजी और हिंदी में स्नातकोत्तर की डिग्री भी है। इतनी मजबूत शैक्षिक पृष्ठभूमि के साथ, वह भारत में यूपीएससी परीक्षा के लिए उच्च योग्य प्रोफेसरों में से एक हैं।
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पारिवारिक दबाव में शुरू की यूपीएससी की तैयारी
रिपोर्ट्स की मानें तो अपनी प्रोफेशनल एजुकेशन पूरी करने के बाद डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों को पढ़ाना शुरू किया। जब वे दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों को पढ़ा रहे थे, तब विकास दिव्यकीर्ति ने अपने परिवार और रिश्तेदारों के दबाव के कारण यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि, सभी को आश्चर्यचकित करते हुए, उन्होंने 1996 में AIR 384 के साथ अपने पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की।
नौकरी ज्वाइन करने के कुछ महीनों में ही दिया इस्तीफा
भारत की सबसे कठिन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, विकास दिव्यकीर्ति को गृह मंत्रालय में तैनात किया गया। जहां कुछ महीनों तक काम करने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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विकास दिव्यकीर्ति के कुछ इंटरव्यूज के आधार पर ये कहा जा सकता है कि गृह मंत्रालय में कुछ समय काम करने के बाद उन्हें ये लगा कि शिक्षण एक ऐसी चीज है जिसके साथ वह समाज पर और भी बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए, उन्होंने आईएएस अधिकारी की नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
यह स्पष्ट रूप से उनके माता-पिता और रिश्तेदारों के लिए चौंकाने वाली खबर थी, जो यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सातवें आसमान पर थे। लेकिन इस बार, विकास दिव्यकीर्ति अपने सपनों की नौकरी, जो कि शिक्षण था, के प्रति दृढ़ थे। परिणामस्वरूप, 1999 में उन्होंने दिल्ली के मुखर्जी नगर में दृष्टि आईएएस कोचिंग सेंटर खोला।
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1999 में की दृष्टि आईएएस की स्थापना
विकास दिव्यकीर्ति ने कथित तौर पर अपना पहला कोचिंग सेंटर, दृष्टि आईएएस, दिल्ली में खोला और बाद के वर्षों में, देश के विभिन्न हिस्सों में चार और सेंटर खोले गए। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, दृष्टि आईएएस के पास भारत की सिविल सेवाओं में असाधारण स्टूडेंट्स को लाने का एक मजबूत रिकॉर्ड है। उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2022 में इस कोचिंग के 216 से अधिक छात्रों ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की।
दृष्टि आईएएस कोचिंग सेंटर की फीस की बात करें तो कई रिपोर्ट्स के मुताबिक यह करीब 1 लाख रुपए है। हालांकि, शुल्क पाठ्यक्रम के अनुसार फीस अलग-अलग होती है। उनके कोचिंग से जुड़ी ज्यादा जानकरी कोचिंग के आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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