NIIT Foundation: दिल्ली में एनआईआईटी फाउंडेशन का खास आयोजन, दिखाई डिजिटल बदलाव की झलक
NIIT Foundation: देश में सामाजिक बदलाव और समावेशी विकास को लेकर काम कर रहे प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन NIIT फाउंडेशन ने हाल ही में राजधानी दिल्ली में एक खास पहल की। फाउंडेशन ने नई दिल्ली स्थित यूएसआई परिसर में अपनी पहली इंपैक्ट एक्सपेरिमेंटल वर्कशॉप का आयोजन किया। यह वर्कशॉप केवल आमंत्रित लोगों के लिए थी। इसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी लोगों ने हिस्सा लिया।
सोशल इम्पैक्ट को लेकर मंथन
इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक प्रभाव को कैसे और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। कार्यक्रम में कॉर्पोरेट सेक्टर, सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों, नीति निर्माण से जुड़े लोगों और डेवलपमेंट इकोसिस्टम के कई ल दिखे। सभी ने अपने अनुभव साझा किए और यह चर्चा की कि तकनीक के सही इस्तेमाल से जमीनी स्तर पर बदलाव कैसे लाया जा सकता है।

कार्यक्रम की थीम पर रहा फोकस
इस खास आयोजन की थीम "फ्यूचर-रेडी इम्पैक्ट: ह्यूमैनिटी, टेक्नोलॉजी और इन्क्लूजन" रखी गई थी। इस थीम के जरिए इस बात पर जोर दिया गया कि समाज में मौजूद सुविधाओं और अवसरों की कमी को दूर करने के लिए तकनीक को कैसे एक मजबूत साधन बनाया जा सकता है। चर्चा का केंद्र यह रहा कि डिजिटल समाधान गांवों, दूरदराज के इलाकों और जरूरतमंद लोगों तक कैसे पहुंचाए जाएं।
डिजिटल बस और अनुभव आधारित बूथ
वर्कशॉप में शामिल लोगों को एनआईआईटी फाउंडेशन की डिजिटल बस पहल को करीब से देखने का मौका मिला। इसके अलावा कई अनुभव आधारित बूथ भी लगाए गए थे, जहां यह दिखाया गया कि फाउंडेशन किस तरह से डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। इन बूथ्स के जरिए शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग और डिजिटल साक्षरता से जुड़े कामों की झलक दिखाई गई।
सांसद सुजीत कुमार का संबोधन
इस वर्कशॉप में राज्यसभा सांसद और संचार व सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी स्थायी समिति के सदस्य सुजीत कुमार वर्चुअल रूप से शामिल हुए। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत पर बात करते हुए कहा कि भारत में डाटा से जुड़ा सिस्टम काफी मजबूत है। ऐसे में जरूरी है कि तकनीक का सही असर दूर-दराज के गांवों और कमजोर वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने एनआईआईटी फाउंडेशन जैसे संगठनों की भूमिका को इस दिशा में अहम बताया।
NIIT फाउंडेशन की सोच
कार्यक्रम के दौरान एनआईआईटी फाउंडेशन की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सपना मौदगिल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उनके लिए इंपैक्ट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह लोगों, साझेदारी और नीतियों के एक साथ काम करने से बनने वाली एक सच्चाई है। उन्होंने बताया कि जब तकनीक को समझदारी और संवेदनशीलता के साथ इस्तेमाल किया जाता है, तो यह युवाओं के लिए सम्मान, अवसर और लंबे समय तक चलने वाला बदलाव ला सकती है।
देशभर में फैला काम
एनआईआईटी फाउंडेशन का काम आज देश के लगभग 83 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुका है। इन इलाकों में फाउंडेशन अब तक 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा लोगों को अलग-अलग तरह की स्किल ट्रेनिंग दे चुका है। इसके साथ ही, इसके कार्यक्रमों के जरिए 3 लाख से अधिक लोगों को रोजगार भी मिला है।
युवाओं और महिलाओं पर खास ध्यान
फाउंडेशन की पहलों का खास फोकस वंचित युवाओं पर है। इनमें महिलाएं और पहली पीढ़ी के छात्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। संगठन डिजिटल और वित्तीय साक्षरता, एसटीईएम शिक्षा, रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है।
बढ़ती डिजिटल स्किल की जरूरत
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के भारत से जुड़े विश्लेषण के मुताबिक, साल 2030 तक देश के करीब 63 प्रतिशत कामगारों को डिजिटल स्किल्स की जरूरत होगी। इसमें यह भी बताया गया है कि कई लोगों की ट्रेनिंग बीच में छूटने का खतरा बना रहता है। जैसे-जैसे भारत डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हर सेक्टर में जॉब के लिए तैयार डिजिटल स्किल वाले लोगों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।












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