पहली महिला CJI बनकर Justice BV Nagarathna रचेंगी इतिहास? DU से है खास रिश्ता, कौन-कौन सी डिग्री है इनके पास
Justice BV Nagarathna Academic Profile: भारत के न्यायिक इतिहास में वह दिन अब दूर नहीं जब देश को पहली बार एक महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) मिलेगी। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रही हैं सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जो न सिर्फ अपने फैसलों के लिए जानी जाती हैं बल्कि अपने न्यायप्रिय और संवेदनशील रवैये के लिए भी चर्चित हैं।
दिलचस्प बात यह है कि वह एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां न्यायपालिका की विरासत पहले से ही मौजूद है - उनके पिता देश के 19वें मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। आइए जानते हैं उनके अब तक के सफर के बारे में, जिसने देश की सबसे ऊंची न्यायिक कुर्सी तक पहुंचने में उनकी मदद की...

बेंगलुरु में हुआ जन्म
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का जन्म 30 अक्टूबर 1962 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुआ था। वह भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ई.एस. वेंकटरमैया की बेटी हैं, जो जून से दिसंबर 1989 तक देश के 19वें मुख्य न्यायाधीश रहे थे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई
नागरत्ना ने 1984 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के जीसस एंड मैरी कॉलेज से इतिहास में बीए किया। इसके बाद उन्होंने 1987 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की।
वकील के रूप में शुरुआत
नागरत्ना ने 28 अक्टूबर 1987 को वकील के तौर पर नामांकन कराया और बेंगलुरु की एक जानी-मानी लॉ फर्म केसवी एंड कंपनी में काम करना शुरू किया। करीब 7 साल बाद उन्होंने 1994 में स्वतंत्र वकालत शुरू की।
कई कानून क्षेत्रों में किया काम
वकील के तौर पर नागरत्ना ने कर्नाटक हाईकोर्ट में संवैधानिक कानून, पारिवारिक कानून, व्यावसायिक कानून, बीमा कानून, सेवा कानून, प्रशासनिक कानून, सार्वजनिक कानून, भूमि विवाद, अनुबंध, मध्यस्थता और सुलह जैसे विषयों पर काम किया। वह अक्सर कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति का प्रतिनिधित्व भी करती थीं।
जज बनने का सफर
करीब 20 साल वकालत करने के बाद, 18 फरवरी 2008 को उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। दो साल बाद 17 फरवरी 2010 को वे स्थायी न्यायाधीश बन गईं। न्यायाधीश रहते हुए वे कर्नाटक न्यायिक अकादमी और बेंगलुरु मध्यस्थता केंद्र की अध्यक्ष भी रहीं।
लेखन और अनुवाद में भी योगदान
सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रकाशित किताब Courts of India: Past and Present में उन्होंने कर्नाटक की अदालतों पर एक अध्याय लिखा। इसके साथ ही उन्होंने इस किताब के कन्नड़ अनुवाद का भी नेतृत्व किया, जो अप्रैल 2021 में जारी हुआ।
सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक नियुक्ति
17 अगस्त 2021 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने जस्टिस नागरत्ना को सुप्रीम कोर्ट के लिए सिफारिश किया। 31 अगस्त को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उनके साथ ही जस्टिस हिमा कोहली और बेला एम. त्रिवेदी की भी नियुक्ति हुई, जो एक साथ सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली महिला जजों की सबसे बड़ी संख्या थी।
देश की पहली महिला CJI बनने की ओर
अगर वरिष्ठता के नियम का पालन हुआ, तो जस्टिस नागरत्ना भारत की 54वीं मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। वे इस पद पर 36 दिनों तक रहेंगी। इसी के साथ वह देश की पहली महिला CJI बनने का इतिहास भी रचेंगी।
ये भी पढ़ें: Who is BV Nagarathna: कौन हैं BV नागरत्ना? जो भारत की पहली महिला CJI बनने की राह पर, कार्यकाल सिर्फ 36 दिन












Click it and Unblock the Notifications