राजित-सक्षम दोनों को आए सेम नंबर, फिर भी एक को क्यों मिला AIR 1? समझिए JEE के 'टाई ब्रेकर रूल' का गेम
JEE Advanced 2025: जेईई एडवांस्ड 2025 का रिजल्ट आते ही सोशल मीडिया और स्टूडेंट कम्युनिटी में एक सवाल उठने लगा कि जब दो छात्रों को एक जैसे अंक मिले, तो फिर टॉपर कौन और क्यों? दरअसल, इस साल जेईई एडवांस्ड में कोटा के राजित गुप्ता और हिसार के सक्षम जिंदल - दोनों ने ही 360 में से 332 नंबर हासिल किए।
इतने मुश्किल और प्रतिस्पर्धी एग्जाम में ये स्कोर किसी अजूबे से कम नहीं है। लेकिन जब रिजल्ट घोषित हुआ, तो टॉपर की कुर्सी पर सिर्फ एक नाम था - राजित गुप्ता। सक्षम जिंदल को मिला AIR 2. सवाल उठा कि जब मार्क्स एक जैसे थे, तो रैंक में अंतर कैसे आया?

जवाब है - जेईई एडवांस्ड की बेहद दिलचस्प टाई-ब्रेकिंग पॉलिसी, जो बराबरी के इस मुकाबले में सबसे अहम फैक्टर बन गई। आइए जानते हैं इस नियम के पीछे की पूरी कहानी। कैसे राजित इस माइक्रो मुकाबले में भी आगे निकल गए।
कैसे काम करता है टाई ब्रेकिंग सिस्टम?
जब दो या ज्यादा उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो टाई ब्रेकिंग का नियम लागू किया जाता है। इसके तहत पहले यह देखा जाता है कि किस उम्मीदवार ने मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री में बेहतर स्कोर किया है।
अगर विषयवार अंक भी बराबर हों, तो फिर पेपर 1 और पेपर 2 के स्कोर की तुलना की जाती है। किसी एक पेपर में बेहतर प्रदर्शन करने वाला छात्र आगे बढ़ता है।
अगर इसके बाद भी टाई नहीं टूटती, तो उम्र या आवेदन नंबर जैसे अन्य मापदंड देखे जाते हैं, हालांकि इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती।
राजित को कैसे मिला AIR 1?
राजित गुप्ता और सक्षम जिंदल दोनों ने शानदार 332 अंक हासिल किए। लेकिन जब टाई ब्रेकिंग नियमों को लागू किया गया, तो किसी एक पैरामीटर पर राजित ने बढ़त बना ली - संभव है कि उनका मैथ्स स्कोर थोड़ा बेहतर रहा हो या किसी एक पेपर में ज्यादा नंबर आए हों। इसी के आधार पर उन्हें ऑल इंडिया रैंक 1 मिला और सक्षम को रैंक 2 से संतोष करना पड़ा।
कौन हैं ये दोनों होनहार छात्र?
राजित गुप्ता कोटा के रहने वाले हैं और उन्होंने जेईई मेन 2025 में भी 100 पर्सेंटाइल स्कोर किया था। वो पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखने पर भी जोर देते थे और अपनी गलतियों से सीखते थे। उनका सपना है कि वह आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करें।
दूसरी ओर, सक्षम जिंदल हरियाणा के हिसार से हैं। उन्हें गणित से विशेष लगाव था और इसी रुचि ने उन्हें जेईई की ओर खींचा। उन्होंने भी जेईई मेन में 100 पर्सेंटाइल हासिल किए और अब वह भी आईआईटी बॉम्बे में ही दाखिला लेना चाहते हैं।
कड़ी मेहनत का नतीजा
जेईई एडवांस्ड जैसे कठिन परीक्षा में 332 अंक लाना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। दोनों छात्रों ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। भले ही टाई ब्रेकिंग पॉलिसी ने रैंक में अंतर कर दिया हो, लेकिन दोनों की सफलता समान रूप से प्रेरणादायक है।
टाई ब्रेकिंग से मिला जवाब, लेकिन दोनों हैं विजेता
टाई ब्रेकिंग सिस्टम ने भले ही AIR 1 और AIR 2 तय कर दिए हों, लेकिन इस उपलब्धि में कोई छोटा या बड़ा नहीं है। राजित और सक्षम दोनों ही अपने-अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आने वाले समय में ये दोनों नाम तकनीकी दुनिया में जरूर सुनाई देंगे।












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