कैंसर को चुनौती, मौत से जंग, आरव ने CBSE एग्जाम में 94 प्रतिशत अंक लाकर गाड़े सफलता के झंडे
Aarav Vats: CBSE 10वीं के परीक्षा परिणाम केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि हज़ारों छात्रों के संघर्ष और अटूट संकल्प की दास्तां भी हैं। इस वर्ष जहां कुल पास प्रतिशत 93.70 रहा, वहीं दिल्ली के एक छात्र की सफलता ने पूरे देश का दिल जीत लिया है।
महरौली के रहने वाले आरव वत्स (Aarav Vats) ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे फौलादी हों, तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती। स्पाइनल कैंसर (लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा/Lymphoblastic Lymphoma) से जूझते हुए और असहनीय शारीरिक पीड़ा सहते हुए भी आरव ने हार नहीं मानी। बिस्तर पर रहते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 96.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर एक मिसाल कायम की है।

जब थम गई थी जिंदगी की रफ्तार
आरव की यह यात्रा कांटों भरी रही है। उनके पिता डॉ. अजय वत्स बताते हैं कि साल 2022 में, जब आरव महज 7वीं कक्षा में थे, तब इस गंभीर बीमारी का पता चला। स्थिति इतनी गंभीर थी कि आरव का चलना-फिरना तक बंद हो गया था।
उन्हें एक बड़े ऑपरेशन से गुजरना पड़ा, जिसमें उनकी रीढ़ की हड्डी में प्लेट्स डाली गईं। इसके बाद शुरू हुआ रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी का लंबा और दर्दनाक सिलसिला। करीब एक साल तक आरव पूरी तरह बेड रेस्ट पर रहे और बाद में धीरे-धीरे वॉकर के सहारे कदम आगे बढ़ाए।
पढ़ाई पूरी करने में स्कूल ने दिया पूरा साथ
न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरव की इस उपलब्धि के पीछे उनके स्कूल, एमिटी इंटरनेशनल (साकेत) और शिक्षकों का बड़ा योगदान रहा। जब वह स्कूल जाने की स्थिति में नहीं थे, तब स्कूल ने उनके लिए विशेष ऑनलाइन कक्षाओं का प्रबंध किया। शिक्षकों ने हर विषय में उनका मार्गदर्शन किया और डॉक्टरों ने न केवल उनका इलाज किया, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें टूटने नहीं दिया। परिवार, चिकित्सा टीम और शिक्षा जगत के सामूहिक प्रयासों ने आरव की राह आसान कर दी।
जानलेवा बिमारी से लड़ते हुए भी नहीं टूटने दिया मनोबल
अपनी सफलता का श्रेय अपनी सोच को देते हुए आरव कहते हैं कि मुश्किल समय में सकारात्मक रहना सबसे जरूरी है। उन्होंने इलाज के दौरान ऐसे लोगों की जीवनियां पढ़ीं जिन्होंने बड़ी बाधाओं को पार कर जीत हासिल की थी। आरव का मानना है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और मेहनत में निरंतरता रहे, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। आज उनकी यह कामयाबी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी बाधाओं से घबरा जाते हैं।
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