पूर्व जन्म में क्या थे आप, राज खोलती है कुंडली

नई दिल्ली, 9 जून। मनुष्य अपना भविष्य जानने के साथ-साथ भूतकाल जानने के प्रति भी उत्सुक रहता है। जब 84 लाख योनियों की बात की जाती है तो मनुष्य यह जानने का प्रयास करता है किवह पिछले जन्म में क्या था। इस प्रश्न का उत्तर देती है मनुष्य की जन्मकुंडली। कहा जाता है मनुष्य प्रारब्ध लेकर जन्म लेता है, अर्थात् पिछले जन्मों के अच्छे-बुरे कर्मो के फलस्वरूप मनुष्य का यह जन्म निश्चित होता है कि उसे किसी प्रकार की योनि में किस प्रकार के परिवार में जन्म लेना है। जन्मकुंडली के ग्रहों की स्थिति, युति, दृष्टि संबंध आदि देखकर यह आसानी से पता किया जा सकता है किमनुष्य का पिछला जन्म कैसा था।

पूर्व जन्म में क्या थे आप, राज खोलती है कुंडली
  • यदि जातक की जन्मकुंडली में चार या इससे अधिक ग्रह उच्च राशि के अथवा स्वराशि के हों तो जातक उत्तम योनि भोगकर इस जन्म में आया है।
  • यदि लगन में उच्च राशि या स्वराशि का चंद्रमा हो तो बालक पूर्व जन्म में सद्विवेकी वणिक रहा होगा।
  • लग्न में गुरु का होना इस बात का सूचक है किबालक पूर्वजन्म में वेदपाठी ब्राह्मण था। यदि कुंडली में कहीं भी उच्च का गुरु होकर लग्न को देख रहा हो तो बालक पूर्व जन्म में धर्मात्मा, सद्गुणी एवं विवेकशील साधु अथवा तपस्वी रहा होगा।
  • जन्मकुंडली में सूर्य छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो अथवा तुला राशि का हो तो बालक पूर्व जन्म में पापरत एवं भ्रष्ट जीवन व्यतीत करने वाला था।
  • लग्न या सप्तम भाव में यदि शुक्र हो तो जातक पूर्व जन्म में राजा या प्रसिद्ध सेठ था तथा पूर्णत: भोग विलासपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाला था।
  • लग्न, एकादश, सप्तम या चौथे भाव में शनि इस बात का सूचक है किबालक पूर्व जन्म में निम्नवर्गीय परिवार से रहा होगा।
  • यदि लग्न या सप्तम भाव में राहु हो तो बालक की पूर्व जन्म में मृत्यु स्वाभाविक रूप से नहीं हुई होगी।
  • कुंडली में चार या अधिक ग्रह नीच राशि के हों तो बालक ने पूर्व जन्म में निश्चित रूप से आत्महत्या की होगी।
  • लग्न में स्थित बुध से पता चलता है किजातक पूर्व जन्म में वणिक होगा तथा पारिवारिक क्लेशों से ग्रसित होगा।
  • छठे, सातवें या दसवें भाव का मंगल हो तो जातक पूर्व जन्म में अत्यंत क्रोधी होगा तथा कई लोग उससे पीड़ित होंगे।
  • बृहस्पति शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तथा पंचम या नवम भाव में हो तो जातक पूर्व जन्म में वीतरागी रहा होगा।
  • एकादश में सूर्य, पंचम में बृहस्पति तथा द्वादश में शुक्र हो तो जातक पूर्व जन्म में धर्मात्मा लोगों की सहायता करने वाला तथा दान-पुण्य में तत्पर रहा होगा।

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