Venus Rising or Shukra Grah Ka Uday: शुक्र का उदय, 71 दिनों में विवाह के 27 मुहूर्त
नई दिल्ली, 18 अप्रैल। विवाह के लिए गुरु और शुक्र के तारे का उदित अवस्था में होना अत्यंत आवश्यक है। इन दोनों ग्रहों के अस्त होने की स्थिति में विवाह करना निषेध रहता है। कारण यह है कि गुरु वैवाहिक सुख का कारक है तो शुक्र दांपत्य सुख प्रदान करता है। 12 फरवरी 2021 से शुक्र का तारा अस्त होने के कारण विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध था, अब चैत्र शुक्ल पंचमी 17 अप्रैल 2021 से शुक्र का पश्चिम दिशा में उदय हुआ है, इसका शुभ प्रभाव है और इसलिए अब विवाह सहित समस्त मांगलिक आयोजन फिर से प्रारंभ हो सकते हैं, शुक्र उदय होने के बाद विवाह का पहला मुहूर्त 24 अप्रैल को आ रहा है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार वैवाहिक आयोजन के लिए शुक्र व गुरु के तारे का उदय होना आवश्यक है। शुक्र का तारा उज्जैन के पंचांग के अनुसार 17 अप्रैल को पश्चिम दिशा में उदित हुआ जबकि कुछ अन्य पंचांग में शुक्र का उदय 18 अप्रैल को रात 9.34 बजे बताया गया है। शुक्र के उदय होने के बाद विवाह का पहला मुहूर्त 24 अप्रैल को होगा और देवशयनी एकादशी से पहले 3 जुलाई तक कुल 71 दिन में विवाह के 27 शुभ मुहूर्त रहेंगे।
गुरु-शुक्र ने अटकाए विवाह
इस साल 16 जनवरी से 13 फरवरी तक गुरु का तारा अस्त था इस कारण विवाह के मुहूर्त नहीं थे। गुरु के उदय होने के एक दिन पहले 12 फरवरी को शुक्र का तारा अस्त हो गया था। गुरु और शुक्र के तारे अस्त होने के चलते इस वर्ष अब तक वैवाहिक आयोजन नहीं हुए हैं।
71 दिन में विवाह के ये हैं शुभ मुहूर्त
- अप्रैल (5 मुहूर्त) : 24, 25, 26, 27, 30
- मई (10 मुहूर्त) : 1, 2, 7, 8, 9, 22, 23, 24, 26, 30
- जून (9 मुहूर्त) : 5, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 30
- जुलाई (3 मुहूर्त) : 1, 2, 3
राशियों पर प्रभाव
शुक्र के उदय होने के कारण समस्त राशियों पर इसका शुभ प्रभाव होगा। शुक्र भोग-विलास, दांपत्य सुख, सौंदर्य, आकर्षण, प्रेम का प्रतिनिधि ग्रह है। शुक्र के उदय होने के कारण समस्त राशियों के जातकों में आपसी प्रेम बढ़ेगा। एक-दूसरे का सहयोग करने की भावना प्रबल होगी। जिन दंपतियों के विवाह में दिक्कत है, वह दूर होगी। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी।
किस दिशा में करें देवी अष्टमी पूजा
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन हिंदू परिवारों में कुल देवी की पूजा की जाती है। देवी पूजा में दिशा का बड़ा महत्व होता है। अधिकांश परिवार पंडितों से दिशा पूछकर पूजन करते हैं। इसका सीधा सा सिद्धांत यह है कि जिस दिशा में शुक्र का तारा उदय होता है, उसकी विपरीत दिशा में मुंह करके पूजन किया जाता है। इस बार शुक्र का तारा पश्चिम दिशा में उदय हो रहा है इसलिए देवी पूजा घर की पूर्वी दीवार पर करना शास्त्र सम्मत रहता है। इसलिए पूजा करते समय साधकों या गृहस्थों का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
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