VASTU TIPS : अगर नहीं होना चाहते हैं बीमार तो अपनाएं ये टिप्स
VASTU TIPS FOR HOME: वास्तुशास्त्र दसों दिशाओं की ऊर्जा पर काम करता है। यदि सभी दिशाओं की ऊर्जा संतुलित है तो वह घर सुख-समृद्धि का भंडार रहेगा किंतु किसी भी दिशा की ऊर्जा का संतुलन बिगड़ा तो परेशानियां शुरू हो जाती है।
नैऋत्य दिशा का स्वामी राहु होता है। इसलिए सबसे ज्यादा इस दिशा का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि राहु की स्थिति बिगड़ी तो यह सीधे परिवार के मुखिया को प्रभावित करता है और घर के अन्य सदस्य भी बीमार बने रहते हैं।

आइए जानते हैं नैऋत्य दिशा के दोष के बारे में-
नैऋत्य दिशा का स्वामी राहु है और यहां कालपुरुष के दोनों पांवों की एड़ियां एवं बैठक होती है। यदि घर के नैऋत्य में खाली स्थान है, गड्ढा है, भूतल है या कांटेदार वृक्ष है तो गृहस्वामी बीमार, शत्रुओं से पीड़ित और निर्धन रहेगा। जन्मकुंडली का आठवां एवं नवां भाव नैऋत्य के प्रभाव में रहता है।
- नैऋत्य हमेशा भारी रहना चाहिए। यदि यह जगह खाली या हल्की है तो गृहस्वामी का खजाना खाली रहेगा।
- नैऋत्य दिशा में बोरवेल या कुआं है तो वह राहु-चंद्रमा युति का प्रभाव है। इससे गृहस्वामी मानसिक तनाव में रहेगा।
- यदि मकान पुराना है और नैऋत्य दिशा में टूटी हुई दीवार या दरार है और वहीं कुआं या बोरवेल है तो घर में कोई न कोई प्रेतबाधा से पीड़ित रहेगा।
- नैऋत्य में रसोईघर है तो पति-पत्नी में हमेशा लड़ाई होती रहेगी।
- यदि नैऋत्य में बेडरूम है तो गृहस्वामी को ऐशा आराम की चाहत रहेगी।
- नैऋत्य में बाथरूम है तो गृहस्वामी को बार-बार प्रतिकूल स्थितियों का सामना करना पड़ेगा।
- ईशान की अपेक्षा नैऋत्य दिशा में ढलान हो और जल का प्रवाह उस दिशा में हो तो लोगों से शत्रुता रहती है।
बचने के उपाय
यदि घर के नैऋत्य में कोई दोष है तो उससे बचने के लिए या उस दोष को दूर करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।
दिशादोष निवारणार्थ घर के पूजा स्थाल पर राहु यंत्र स्थापित कर उसका नित्य पूजन करें।
मुख्य द्वार पर भूरे या मिश्रित रंगवाले गणपति की मूर्ति लगाएं।












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