VASTU TIPS : कहीं आपका घर की दिशा भी तो गड़बड़ नहीं? कहीं इसी वजह से तो घर में कंगाली नहीं?
Vastu Tips: पूर्व दिशा का महत्व सर्वाधिक होता है, चाहे वास्तु हो या ज्योतिष। पूर्व दिशा से प्रकृति और सृष्टि का पोषक सूर्य उदित होता है और अपनी रश्मियों से संपूर्ण संसार को रोशन करता है।

इसलिए वास्तु शास्त्र में पूर्वमुखी घरों को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। घर बनवाते समय इस दिशा के संबंध में क्या बातें ध्यान रखने की है, आइए जानते हैं-
पूर्व दिशा से लाभ
- घर की पूर्व दिशा को खाली छोड़ देना चाहिए। पूर्व में जगह अधिक खाली हो तो धन एवं वंश की वृद्धि होती है।
- पूर्वी दिशा में बने कमरों, बरामदों आदि का पूर्वी हिस्सा नीचा हो तो उस भवन में रहने वाले सभी स्वस्थ रहते हैं।
- घर की पूर्वी दिशा में लगाए गए सभी द्वार भी पूर्वोन्मुखी हो तो घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।
- उत्तर दिशा को खाली छोड़ना चाहिए, यदि पूर्व मुखी मकान में उत्तर दिशा की ओर खाली जगह नहीं छोड़ी गई है घर के भीतर का वास्तु ठीक है तो ऐसा भवन शुभ होता है।
- घर की पूर्व दिशा की ओर यदि दीवार, बाउंड्रीवाल है तो यह यह जितनी नीची होगी घर के मालिक को उतनी ज्यादा प्रतिष्ठा मिलेगी।
- पूर्व दिशा की चारदीवारी पश्चिमी चारदीवारी से कम ऊंचाई की होना चाहिए। इससे पुत्र पौत्रों में वृद्धि होती है।
- पूर्वी दिशा में जल स्थान होना चाहिए। कुआं, बोरवेल, पानी की टंकी इसी दिशा में होना शुभ रहता है।
पूर्वी दिशा से हानि
- पूर्व दिशा की जगह अन्य दिशाओं से ऊंची हो तो घर के मालिक की तरक्की नहीं होगी और धन की तंगी हमेशा बनी रहेगी।
- पूर्व की ओर खाली जगह रखे बिना चारदीवारी से सटा हुआ निर्माण किया है तो पुरुष संतान में कमी रहती है।
- पूर्व दिशा में लगे हुए द्वार आग्नेयमुखी हो तो घर में दरिद्रता बनी रहती है। अदालती मामले, चोर भय और आग का भय रहता है।
- पूर्व में ऊंचे चबूतरे आदि बनवा लिए हैं तो इससे घर में अशांति, व्यर्थ के वाद-विवाद होते रहते हैं।
- पूर्वी भाग में कचरा, गंदगी, टूटे-फूटे फर्नीचर, पत्थर आदि रखे हों तो धन की तंगी और संतान की हानि होती है।
- मकान किराए पर देने वाले मकार मालिकों को ऊपर की मंजिल पर स्वयं रहना चाहिए।












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