नए फ्लैट में निकल जाए वास्तु दोष, तब जानिए क्या करें?

नई दिल्ली। आजकल बढ़ती जनसंख्या और महंगे होते जा रहे मकानों के कारण महानगरों के बाद अब छोटे शहरों में भी अपार्टमेंट यानी फ्लैट में रहने का चलन बढ़ने लगा है। इन बहुमंजिला इमारतों में अनेक परिवारों के रहने के लिए छोटे-बड़े हर आकार-प्रकार के फ्लैट बनाए जा रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इन्हें बनाने में वास्तु के कितने नियमों का पालन होता होगा। शायद ज्यादा नहीं।

हालांकि आजकल कई बहुमंजिला इमारतों के बिल्डर यह दावा करते हैं कि उनके फ्लैट वास्तु अनुरूप बने हुए हैं, लेकिन उन दावों में कितनी सच्चाई होती है यह कोई जानकार ही बता सकता है। ऐसे अपार्टमेंट के फ्लैटों में यदि कोई वास्तु दोष है तो उसमें रहने वालों पर उसका विपरीत असर पड़ना तय है।

आइये जानते हैं वे कौन सी स्थितियां और दोष हैं जो किसी अपार्टमेंट या फ्लैट में वास्तुदोष उत्पन्न करती हैं और उनके निवारण के क्या तरीके हो सकते हैं...

भूमि का चयन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए

भूमि का चयन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए

सबसे पहली बात भूमि संबंधी वास्तु के नियम सभी जगह समान रूप से लागू होते हैं इसलिए भूमि का चयन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। उस भूमि पर चाहे स्वतंत्र मकान बनाना हो या फिर बहुमंजिला अपार्टमेंट, भूमि देखभाल कर ही लेना चाहिए। वास्तुशास्त्र में बहुमंजिला इमारतें बनाने के लिए अलग से किसी भी प्रकार के नियम नहीं बताए गए हैं, इसलिए सभी फ्लैटों पर भी स्वतंत्र मकान की तरह ही दिशाओं के नियम लागू होते हैं।

ये हैं कुछ बिंदु जिनका ध्यान रखा जाना आवश्यक है

ये हैं कुछ बिंदु जिनका ध्यान रखा जाना आवश्यक है

  • बहुमंजिला इमारत का निर्माण भूमि के चारों दिशाओं में कुछ फीट खाली स्थान छोड़कर किया जाना चाहिए। उत्तर व पूर्व की ओर अधिक तथा दक्षिण और पश्चिम की ओर कम खाली स्थान छोड़ना चाहिए। इमारत का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए।
  • वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार बहुमंजिला इमारतों के लिए हमेशा आयताकार या चौकोर समकोणीय भूखंड उपयुक्त रहता है।
  • बहुमंजिला इमारतों में पार्किंग की जगह ईशान कोण में रखना चाहिए और भूखंड का ढलान हमेशा उत्तर-पूर्व की ओर हो।
  • इमारतों के फ्लैट बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि नीचे की मंजिल की ऊंचाई ऊपर की मंजिल से कम होनी चाहिए।
  • रसोईघर आग्नेय या दक्षिण दिशा में हो

    रसोईघर आग्नेय या दक्षिण दिशा में हो


    • लिफ्ट लगा रहे हैं तो उसके पास ही सीढि़यां होनी चाहिए और सीढि़यां घड़ी की सुई की दिशा में ऊपर की ओर जाना चाहिए।
    • पानी की टंकी ईशान कोण में हो और नैऋत्य कोण यानी दक्षिण-पश्चिम कोने की भूमि उठी हुई होना चाहिए।
    • इमारत के प्रत्येक फ्लैट में रोशनदान, खिड़की और दरवाजों की संख्या सम यानी 2, 4, 6 इस तरह होना चाहिए।
    • फ्लैट में टॉयलेट, स्नानगृह नैऋत्य या पश्चिम दिशा में न हों।
    • रसोईघर आग्नेय या दक्षिण दिशा में हो।
    • सभी कोने समकोण हों अन्यथा कोण वेध होगा।
    • अपार्टमेंट का रंग काला, आसमानी या लाल नहीं करवाना चाहिए।
    • क्या करें

      क्या करें

      • अब सवाल यह उठता है कि बिल्डर वास्तुनियमों का अधिक पालन नहीं करते और यदि आपने ऐसी किसी इमारत में फ्लैट ले लिया है और उसमें वास्तुदोष हैं तो क्या करें।
      • सबसे पहले आप स्वयं देखें या किसी योग्य वास्तुविद से सलाह लें कि दोष क्या है और उसका निवारण कैसे किया जाए, क्योंकि फ्लैटों में तोड़फोड़ करना संभव नहीं होता।
      • आप घर में वास्तु यंत्र की स्थापना करें।
      • नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी

        नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी

        • पूर्वी दिशा जहां से सुबह सूर्य की किरणें घर में आती हों उस जगह क्रिस्टल बॉल रखें, ताकि उस पर सूर्य की किरणें पड़ें और उसका प्रकाश पूरे फ्लैट में फैले।
        • इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी।
        • पूरे घर में नमक के पानी का पोंछा लगाएं।
        • घर के पूजा स्थान को हमेशा साफ-स्वच्छ रखें। किसी तरह की गंदगी न हों।

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