Kartik month vrata: कार्तिक माह में इन कार्यों से पा सकते हैं सुख-समृद्धि

By: पं. गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। भगवान श्रीहरि विष्णु का परम प्रिय महीना है कार्तिक। शास्त्रों में कहा गया है युगों में सर्वश्रेष्ठ सतयुग, शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ वेद और महीनों में सर्वश्रेष्ठ कार्तिक मास होता है। कार्तिक मास को दामोदर मास भी कहा जाता है। क्योंकि इस माह में भगवान विष्णु और उनके पूर्णावतार श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। इस माह के किए गए दान-धर्म हजार गुना अधिक फल प्रदान करते हैें। इसीलिए इस माह में धन, संपदा, सुख, ऐश्वर्य और आरोग्य की प्राप्ति के लिए शास्त्रों में कई तरह के नियम बताए गए हैं। इनमें पूजन से लेकर व्रत तक शामिल है।

आइये जानते हैं कार्तिक में किन-किन देवताओं की पूजा आपको समृद्धिशाली बना सकती है... 

विष्णु पूजा: कार्तिक माह भगवान विष्णु का परमप्रिय महीना है। इसलिए इस माह प्रतिदिन विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करने से व्यक्ति में आश्चर्यजनक रूप से बदलाव आने लगते हैं। सुख, समृद्धि और भोग विलास के तमाम साधन उसे सहज ही प्राप्त होने लगते हैं।

सूर्य पूजा

सूर्य पूजा

कार्तिक माह में सूर्य भी पूर्ण तेज के साथ उपस्थित रहते हैं। इसलिए शास्त्रों का मत है कि कार्तिक माह में सूर्य की पूजा व्यक्ति को स्वस्थ रखती है। कार्तिक माह में ब्रह्म मुहूर्त में जागें, जब आकाश में तारें उपस्थित हों। दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और आदित्यहृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें। पूरे माह ऐसा करने वाला व्यक्ति सदा निरोगी बना रहता है। नेत्र विकार दूर होते हैं।

गायत्री पूजा

गायत्री पूजा

कार्तिक माह में गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने का बड़ा महत्व बताया गया है। इस पूरे माह प्रातः सूर्य उदय होने के समय गायत्री मंत्र की निश्चित संख्या में माला जाप करें। यदि पांच माला जाप का संकल्प लिया है तो पूरे माह पांच माला ही जपें। 11 का संकल्प लिया है तो पूरे माह 11 माला जपें। इस मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति में साहस और निडरता का संचार होता है। शत्रु परास्त होते हैं और जीवन की समस्त बाधाओं का निवारण होता है।

तुलसी पूजा

तुलसी पूजा

तुलसी भगवान श्रीहरि की सबसे प्रिय है। इस माह में तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। कार्तिक माह में प्रतिदिन सायंकाल में तुलसी के समीप दीपक लगाएं। इससे आपके परिवार में सुख-समृद्धि और शांति की वर्षा होने लगेगी। धन संपदा की कभी कमी नहीं होगी और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बना रहेगा।

दीप दान

दीप दान

कार्तिक माह में दीप दान सबसे उत्तम माना गया है। किसी पवित्र नदी या तालाब में प्रतिदिन सूर्य अस्त होने के बाद जब तारे निकल आएं तब दीपदान करना चाहिए। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। फिर जीवन में किसी चीज का अभाव नहीं रह जाता।

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दान-दक्षिणा

दान-दक्षिणा

कार्तिक माह में किया गया दान अनंत गुना फल प्रदान करता है। गरीबों को भोजन, वस्त्र, उनकी जरूरत की वस्तु दान करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है। पितृ प्रसन्न होते हैं।

व्रत-स्नान

कार्तिक माह में किसी संकल्प या कामना को लेकर व्रत-उपवास किया जाए तो वह मनोकामना व्रत पूर्ण होते ही पूरी हो जाती है। कार्तिक माह में तारा स्नान और तारा भोजन किया जाता है। यानी ब्रह्ममुहूर्त में जब तारे आकाश में हो तब उनकी छाव में स्नान करना और रात्रि में जब तारें उदित हों तब भोजन करना।

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English summary
Kartik month which falls under the Dakshinayana period is regarded as the most pious month for sadahana or prayers. When the planet Sun enters in the sign of Tula, the lunar month of Kartik begins
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