Teja Dashmi 2020: तेजादशमी आज, जानिए इस दिन का महत्व और कथा
नई दिल्ली। भारतीय जनमानस में अनेक लोक परंपराएं व्याप्त हैं। हिंदू सनातन धर्म के अलावा भी स्थानीय परिदृश्य में अनेक लोक देवताओं के पूजन की परंपरा चली आ रही है। इन्हीं में से एक है वीर तेजाजी महाराज का पूजन। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन तेजादशमी पर्व मनाया जाता है।

मध्यप्रदेश, राजस्थान में गांव-गांव में तेजादशमी मनाई जाती है और इस दिन अनेक जगहों पर तेजाजी के मंदिरों में मेले लगाए जाते हैं। मान्यता है कि सर्पदंश से बचने के लिए वीर तेजाजी का पूजन किया जाता है। इस वर्ष तेजादशमी 28 अगस्त 2020 शुक्रवार को आ रही है।
तेजा दशमी की कथा
प्रचलित लोक कथा के अनुसार प्राचीन समय में तेजाजी राजा बाक्साजी के पुत्र थे। वे बचपन से ही साहसी थे और जोखिमभरे काम करने से भी नहीं डरते थे। एक बार वे अपने साथी के साथ बहन को लेने उसके ससुराल गए। उस दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी। बहन के ससुराल जाने पर तेजा को पता चला है कि मेणा नामक डाकू अपने साथियों के साथ बहन की ससुराल से सारी गायों को लूटकर ले गया है। तेजाजी अपने साथी के साथ जंगल में मेणा डाकू से गायों को छुड़ाने के लिए गए। रास्ते में एक बांबी के पास भाषक नाम का सांप घोड़े के सामने आ जाता है और तेजा को डंसने की कोशिश करता है। तेजाजी उस सांप को वचन देते हैं कि अपनी बहन की गायों को छुड़ाने के बाद मैं वापस यहीं आऊंगा, तब मुझे डंस लेना। ये सुनकर सांप ने रास्ता छोड़ दिया।
'तुम्हारा पूरा शरीर खून से अपवित्र हो गया है'
तेजाजी डाकू से अपनी बहन की गायों को आजाद करवा लेते हैं। डाकुओं से हुए युद्ध की वजह से वे लहूलुहान हो जाते हैं और ऐसी ही अवस्था में सांप के पास जाते हैं। तेजा को घायल अवस्था में देखकर नाग कहता है कि तुम्हारा पूरा शरीर खून से अपवित्र हो गया है। मैं डंक कहां मारुं? तब तेजाजी उसे अपनी जीभ पर काटने के लिए कहते हैं। तेजाजी की वचनबद्धता को देखकर नागदेव उन्हें आशीर्वाद देते हैं कि जो व्यक्ति सर्पदंश से पीड़ित है, वह तुम्हारे नाम का धागा बांधेगा, उस पर जहर का असर नहीं होगा। उसके बाद नाग तेजाजी की जीभ पर डंक मार देता है। इसके बाद से हर साल भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजाजी के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। जिन लोगों ने सर्पदंश से बचने के लिए तेजाजी के नाम का धागा बांधा होता है, वे मंदिर में पहुंचकर धागा खोलते हैं।
कौन थे वीर तेजाजी महाराज
लोक देवता वीर तेजाजी महाराज का जन्म नागौर जिले में खड़नाल गांव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ल चतुर्दशी संवत् 1130 यथा 29 जनवरी 1074 को जाट परिवार में हुआ था। तेजाजी के माता-पिता को कोई संतान नहीं थी तब उन्होंने शिव पार्वती की कठोर तपस्या की, जिसके परिणामस्वरूप उनके घर तेजाजी का जन्म हुआ था। माना जाता है जब वे दुनिया में आए तो एक भविष्यवावाणी में कहा गया था कि भगवान ने स्वयं आपके घर अवतार लिया है। ये अधिक वर्ष तक इस रूप में नहीं रहेंगे। बचपन में ही तेजाजी का विवाह पनेर के रायमल जी सोढ़ा के यहां कर दिया गया था।
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