Surya Grahan 2026: इस दिन लगेगा सदी का सबसे बड़ा सूर्यग्रहण, 6 मिनट 22 सेकंड के लिए दुनिया में छाएगा अंधेरा
Surya Grahan 2026 Updated Hindi: होली के अवसर पर इस बार साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जिसकी वजह से इस बार होलिका दहन के अगले दिन होली नहीं खेली नहीं जाएगी। मालूम हो कि 2 मार्च को होलिका दहन होगा जिसकी अगली सुबह चंद्र ग्रहण का सूतक काल लग जाएगा जिसकी वजह से पूजा-पाठ और शुभ काम वर्जित हो जाएगा इसलिए रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी।
मालूम हो कि चंद्र ग्रहण की चर्चा के बीच लोगों के दिमाग में चल रहा है कि देश में दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा तो वहीं कुछ जगहों पर कहा जा रहा है कि साल का दूसरा सूर्य ग्रहण सदी का सबसे बड़ा सू्र्य ग्रहण होगा तो आपका भ्रम हम दूर कर देते है।

पहला सवाल का उत्तर ये है कि इस साल दो सूर्य ग्रहण हैं, पहला 17 फरवरी को था और दूसरा अब 12 अगस्त 2026 को लगेगा और पहले की तरह ये भी इंडिया में नजर नहीं आएगा। भारतीय समयानुसार ये ग्रहण रात 9:04 PM से सुबह 4:25 AM बजे तक रहेगा और यूरोप, कनाडा, ग्रीनलैंड में नजर आएगा, इसका सूतककाल भारत में प्रभावी नहीं होगा इसलिए पूजा-पाठ वर्जित नहीं होंगे।
Biggest Surya Grahan Kab: सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण 2027 में
तो वहीं 21वीं सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण लगेगा 2 अगस्त, 2027 को लगेगा जो कि Space.com के मुताबिक 6 मिनट 22 सेकंड तक होगा। ऐसी घटना पहले 1991 में हुई थी और अगली बार यह 16 जुलाई, 2114 को दिखेगी। यह कई देशों में दिन को भी घने अंधेरे में बदल देगा। जिस वक्त ये ग्रहण लगेगे उस वक्त कुछ देर के लिए ब्रह्मांड में कुछ पल के लिए अंधेरा छा जाएगा, दिन में में रात हो जाएगी।
Surya Grahan भारत में आएगा नजर, लगेगा सूतक काल
इस पूर्ण सूर्य ग्रहण से लगभग 11 देश प्रभावित होंगे। यह ज्यादातर उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों में पूर्ण रूप से नजर आएगा। स्पेन, जिब्राल्टर, अल्जीरिया, मोरक्को, ट्यूनीशिया, लीबिया, सऊदी अरब, यमन, सूडान, मिस्र और सोमालिया में ये पूरी तरह नजर आएगा तो वहीं भारत में यह ग्रहण आंशिक रूप में ही दिखेगा।राजस्थान, गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र के लोग इसका दीदार कर पाएंगे इसलिए इसका सूतक काल भी लगेगा।
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण कब लगता है?
सूर्य ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। यह घटना अमावस्या के दिन घटित होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन ज्योतिष में इसे अच्छा नहीं मानते हैं।
राहु-केतु करते हैं सूर्य को परेशान!
आपको बता दें कि भारतीय पुराणों में सूर्य ग्रहण का संबंध राहु और केतु से जोड़ा गया है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय अमृत पीने वाले असुर राहु का सिर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से अलग कर दिया था। तभी से राहु-केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रसित करते हैं।
पिता, पद-प्रतिष्ठा और नेतृत्व का कारण सूर्य
यही नहीं ज्योतिष शास्त्र में सूर्य आत्मा, पिता, पद-प्रतिष्ठा और नेतृत्व का कारक माना जाता है। सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें इस समय सावधान रहने की जरूरत होती है।ग्रहण काल में ध्यान, मंत्र जाप और सूर्य देव की उपासना करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। आदित्य हृदय स्तोत्र और गायत्री मंत्र का जाप करने से इंसान से निगेटिव चीजें दूर रहती हैं।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बातें करें।












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