Sharad Purnima and chand grahan 2023: शरद पूर्णिमा पर लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, कैसे होगी लक्ष्मी पूजा?
Sharad Purnima and chand grahan 2023: अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है, माना जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल में गोपियों संग रास रचाया था और इसी वजह से इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं युक्त होता है और इसी कारण ये उस दिन काफी सुंदर और मोहक नजर आता है।

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा होती है, कहते हैं इस दिन पूजा करने से इनकी पूजा करने से इंसान को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
ग्रहणकाल में कैसे पूजा होगी?
लेकिन इस बार शरद पूर्णिमा के दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लग रहा है और इस वजह से लोगों के मन में शंका पैदा हो गई है कि ग्रहणकाल में कैसे पूजा होगी?
इस बार का चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा
दरअसल ग्रहण को वैदिक धर्म में अच्छा नहीं माना जाता है और इसी वजह से ग्रहणकाल में कोई भी मांगलिक या शुभ काम या फिर पूजा-पाठ वाले काम नहीं होते हैं और इसी कारण लोगों को लग रहा है कि ग्रहणकाल में पूर्णिमा की पूजा कैसे होगी? मालूम हो कि इस बार का चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा और इस वजह से सूतक काल मान्य होगा। माालूम हो कि चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले लग जाता है।
शरद पूर्णिमा कब लगेगी?
- 28 अक्टूबर को 04:17 AM से 29 अक्टूबर को 01:53AM
- 28 अक्टूबर को 05: 20 PM पर चंद्रोदय
चंद्र ग्रहण का समय
28 अक्टूबर का चंद्र ग्रहण भारत में रात 11.30 बजे से आरंभ होगा और रात 02 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा।
सूतक काल प्रारंभ
28 अक्टूबर को दोपहर 02:52 बजे सूतक काल प्रारंभ होगा इसलिए पूर्णिमा की पूजा सूतक काल से पहले या ग्रहण के खत्म होने के बाद होगी।
भारत के अलावा यहां दिखेगा ग्रहण
ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, एशिया, हिंद महासागर, अटलांटिक, दक्षिणी प्रशांत महासागर, आर्कटिक और अंटार्कटिका में देखा जा सकेगा।












Click it and Unblock the Notifications