Sharad Purnima 2017: आज के दिन जरूर करें ये 5 काम, स्वास्थ्य रहेगा अच्छा

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    शरद पूर्णिमा की रात होती है अमृत वर्षा, उठायें लाभ | Sharad Purnima Totke | Boldsky

    नई दिल्ली। इस बार 05 अक्टूबर का दिन खास रहेगा, क्योंकि आज के दिन ही शरद पूर्णिमा, बाल्मिकी जयन्ती, श्री सत्यनारायण व्रत और कार्तिक स्नान प्रारम्भ हो रहा है। लेकिन इन सब में सबसे महत्पूर्ण है शरद पूर्णिमा। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा को आकाश से अमृत की वर्षा होती है। आईये जानते है शरद पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए।

    Sharad Purnima

    पूजन विधि-

    शरद पूर्णिमा को प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठें। पश्चात नित्यकर्म से निवृत्त होकर स्नान करें। स्वयं स्वच्छ वस्त्र धारण कर अपने आराध्य देव को स्नान कराकर उन्हें सुंदर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करें। इसके बाद उन्हें आसन दें। फिर, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से अपने आराध्य देव का पूजन करें। इसके साथ गाय के दूध से बनी खीर में घी तथा मिश्री मिलाकर अर्द्धरात्रि के समय भगवान का भोग लगाएं।

    एक लोटे में जल तथा गिलास में गेहूं, पत्ते के दोने में रोली तथा चावल रखकर कलश की वंदना करके दक्षिणा चढ़ाएं। फिर तिलक करने के बाद गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुनें। तत्पश्चात गेहूं के गिलास पर हाथ फेरकर मिश्राणी के पांव का स्पर्श करके गेहूं का गिलास उन्हें दे दें। अंत में लोटे के जल से रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें। स भी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करें और रात्रि जागरण कर भगवद् भजन करें। चांद की रोशनी में सुई में धागा अवश्य पिरोएं।

    निरोग रहने के लिए पूर्ण चंद्रमा जब आकाश के मध्य में स्थित हो, तब उसका पूजन करें। रात को ही खीर से भरी थाली खुली चांदनी में रख दें। दूसरे दिन सबको उसका प्रसाद दें तथा स्वयं भी ग्रहण करें।

    शरद पूर्णिमा के दिन करें ये काम-

    1- शरीर की इन्द्रियों को मजबूत करने के लिए चाॅदनी रात में खीर बनाकर रखें और दूसरे दिन उस खीर का माॅ लक्ष्मी को भोग लगाकर वैद्य अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना चाहिए कि हमारे शरीर की सभी इन्द्रियों का तेज-ओज बढ़ायें और फिर उस खीर का सभी लोग सेंवन करें।

    2- शरद पूर्णिमा अस्थमा रोगियों के लिए वरदान की रात होती है। अस्थमा रोगियों को रात भर खुले में रहना चाहिए और पूरी रात्रि जागरण करना चाहिए। रात भर रखी हुई खीर का सेंवन करने से दमा रोग में अत्यधिक लाभ मिलता है।

    3- आज के दिन पूजन-अर्चन करें और भूलकर भी रात्रि काम-विलास में लिप्त न रहें अन्यथा होने वाली सन्तानें विकलांग या रोगी होती है।

    4- इस रात सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।

    5- नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए एकादशी से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 10-15 मिनट तक चन्द्रमा को देखकर त्राटक करने से आॅखों के रोगों में कमी आती है और आॅखों की रोशनी तेज होती है।

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