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सृष्टि निर्माण के लिए अवतरित हुए भगवान अर्द्धनारीश्वर

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली।हिंदू धर्मशास्त्रों में भगवान महाशिव को सृष्टि के संहारकर्ता के रूप में स्थान दिया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज सृष्टि का जो विकसित और समृद्ध स्वरूप हमारे सामने है, वह केवल महाशिव की कृपास्वरूप है। माना जाता है कि भोलेनाथ ने अपने भक्तों की इच्छापूर्ति के लिए ही अपने शरीर से शक्ति स्वरूपा को साकार किया, ताकि सृष्टि में संतति की उत्पत्ति का क्रम प्रारंभ हो सके।

आइए, आज इसी कथा से परिचय पाते हैं कि शिव कैसे सृष्टि के केवल संहारक ही नहीं, बल्कि निर्माता भी हैं..

शिव सृष्टि के केवल संहारक ही नहीं, बल्कि निर्माता भी हैं..

शिव सृष्टि के केवल संहारक ही नहीं, बल्कि निर्माता भी हैं..

यह उस समय की बात है, जब ब्रह्मा जी कई वर्षों से सृष्टि के निर्माण की प्रक्रिया में संलग्न थे। अपने प्रारंभिक प्रयासों से वह पुरुष की रचना कर चुके थे, किंतु इस पुरुष से संतति की रचना कैसे होगी, यह विचार अभी साकार रूप ना ले सका था। महती प्रयासों के बाद भी जब ब्रह्मा जी को सफलता नहीं मिली, तब उन्होंने शिव जी की शरण में जाने का विचार किया। ब्रह्मा जी सृष्टि विस्तार के अपने लक्ष्य को हृदय में धारण कर भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गए।

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शिव ने कहा-स्त्री ही शक्ति का पुंज है

शिव ने कहा-स्त्री ही शक्ति का पुंज है

कई वर्षों की तपस्या के बाद अंततः शिव जी प्रसन्न हुए और ब्रह्मा जी के समक्ष प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया कि वे सृष्टि की रचना का विस्तार करना चाहते हैं, ताकि वह स्वयं विकसित और चलायमान हो सके, पर उन्हें राह नहीं सूझ रही। इस पर महाशिव अपने अर्द्धनारीश्वर रूप में प्रकट हुए और ब्रह्मा जी को समझाया कि अभी तक आपने केवल पुरुष की रचना की है, पर स्त्री को नहीं रचा है। स्त्री ही शक्ति का पुंज है। उसके बिना सृष्टि आरंभ नहीं हो सकती, ना ही चलायमान हो सकती है। आपका रचा हुआ पुरुष स्त्री की शक्ति से ऊर्जा लेकर ही सृष्टि का विकास कर पाएगा। इतना कहकर महाशिव ने अपने अर्द्धनारीश्वर स्वरूप से आधे स्त्री स्वरूप को अलग किया।

शक्ति स्वरूपा पुंज ने स्त्री को प्रकट किया

शक्ति स्वरूपा पुंज ने स्त्री को प्रकट किया

शिव के शरीर से पृथक होकर शक्ति स्वरूपा पुंज ने अपनी दोनों भवों के मध्य से एक स्त्री को प्रकट किया। इसके बाद वह पुंज वापस शिव के शरीर में समा गया। ब्रह्मा जी के सामने अब स्पष्ट हो गया कि पुरुष और स्त्री दोनों मिलकर ही उनके स्वप्निल संसार का सृजन कर पाएंगे। कालांतर में यही शक्ति पुंज से उत्पन्न हुई देवी ने प्रजापति दक्ष के घर जन्म लिया और इस कन्या के युवा होने पर स्वयं भोलेनाथ ने उससे विवाह कर गृहस्थ जीवन का आरंभ किया।

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English summary
The Ardhanarishvara is a composite androgynous form of the Hindu deities Shiva and Parvati Ardhanarishvara is depicted as half-male and half-female, equally split down the middle.
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