Must Click: ब्रह्मवैवर्त पुराण की ये बातें मानेंगे तो बनेंगे सुखी

नई दिल्ली। सभी धर्मशास्त्रों में जीवन को सही ढंग से जीने के कई नियम बताए गए हैं, लेकिन अफसोस कि व्यक्ति अच्छी बातों को छोड़कर उन्हें तोड़-मरोड़कर गलत अर्थ निकालकर उनका दुरुपयोग करने लगता है। इसलिए आजकल की पीढ़ी का धर्म शास्त्रों पर विश्वास कम हुआ है।

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सुखी और अच्छा जीवन जीने के कई नियम

हमारे जितने भी पुराण हैं वे हमें सुखी और अच्छा जीवन जीने के कई नियम बताते हैं। उन्हीं में से एक पुराण है ब्रह्मवैवर्त पुराण। इस पुराण के केंद्र भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण हैं। यह चार खंडों में विभाजित है। पहला खंड ब्रह्म खंड है। दूसरा प्रकृति खंड, तीसरा गणपति खंड और चौथा श्रीकृष्ण जन्म खंड है।

आइये आज जानते हैं इस पुराण के कुछ खास सूत्र:

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    • हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि के दिन स्त्री-पुरुष संसर्ग भूलकर भी न करें। इन तिथियों में तेल मालिश, बालों में तेल लगाना भी वर्जित कहा गया है।
    • दीपक, शिवलिंग, शालिग्राम, मणि, देवी-देवताओं की मूर्तियां, यज्ञोपवित, स्वर्ण और शंख को कभी भी सीधे जमीन पर न रखेें। इन्हें किसी पात्र या कपड़े पर किसी ऊंचे स्थान पर रखना चाहिए।
    • ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार घर की स्त्रियां लक्ष्मीस्वरूपा होती हैं। इसलिए वे कभी भी बुरी वाणी न बोलें। जिन स्त्रियों की वाणी से किसी को दुख पहुंचता हो, वह अगले जन्म में कौवे की योनि में जन्म लेती हैं। पति के साथ हिंसा करने वाली स्त्री अगले जन्म में शूकरी बनती है।
    • इसी तरह स्त्रियों पर अत्याचार करने, उन्हें दुखी करने वाले पुरुष मृत्यु तुल्य कष्ट पाते हैं।
    • दिन के समय और सुबह-शाम पूजन के समय स्त्री और पुरुष को समागम नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से लक्ष्मी रूष्ट हो जाती है और कई प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाते हैं।
    • बुरे करेक्टर वाले इंसान के साथ खाना-पीना, घूमना, एक स्थान पर सोना वर्जित माना गया है।
    • सूर्य और चंद्र को अस्त होते समय कभी भी नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से आंखों से संबंधित रोग होने की आशंका रहती है।
    • यदि आपने किसी को दान देने का संकल्प किया है, तो वह तय समय, तिथि और मात्रा में अवश्य करना चाहिए। यदि दान देने में विलंब हो तो तय मात्रा से दोगुना दान करना चाहिए।
    • प्रातः उठते ही सबसे पहले ईष्टदेव का ध्यान करें। भूमि पर पैर रखते समय पृथ्वी को प्रणाम करें। इसके बाद अधिक देर तक बिना नहाए न रहें।
    • कहीं बाहर से घर लौटने पर सबसे पहले घर के बाहर ही दोनों पैरों को साफ पानी से धोएं फिर प्रवेश करें।

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