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Rahu Mangal Gocher (अंगारक योग): राहु और मंगल जब भी एक ही राशि में साथ-साथ गोचर करते हैं तो यह अंगारक योग कहलाता है। राहु का गोचर मीन राशि में पूर्व से जारी है और मंगल ने विगत 23 अप्रैल को मीन राशि में प्रवेश किया है। उसी दिन से अंगारक योग बना हुआ है।
किंतु इस योग का अंतिम चरण सर्वाधिक अंगारक होता है। अर्थात् अंगारक योग का अंतिम चरण अनेक कठिनाइयों भरा होता है। न केवल मनुष्यों, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के लिए भी मुश्किलें पैदा करता है। इस समय देश के विभिन्न राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी इसका प्रमाण है।

वर्तमान में इस अंगारक योग का अंतिम चरण प्रारंभ हुआ है और यह 1 जून तक जारी रहेगा। 1 जून के दिन मंगल के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ ही राहु-मंगल का अंगारक योग समाप्त हो जाएगा और तभी गर्मी से भी राहत मिलेगी। 1 जून को बादल छाने के साथ ही वर्षा होने के आसार भी बनेंगे।
प्रकृति पर्यावरण पर असर
राहु और मंगल दोनों उग्र और अग्नि के प्रतीक ग्रह हैं इसलिए जब भी दोनों एक साथ एक ही राशि में गोचर करते हैं तो इससे अंगारक योग का निर्माण होता है। वर्तमान गोचर में यही योग चल रहा है। अंगारक योग में सूरज के तेवर तीखे होते हैं, पृथ्वी पर अनेक अग्नि से जुड़ी घटनाएं होती हैं। वायुयान दुर्घटना होती है। बड़े राजाध्यक्षों की हानि होती है और देशों में युद्ध जैसे हालात बनते हैं। पृथ्वी के किसी न किसी भाग पर हमें ये घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
मनुष्यों पर असर
अंगारक योग मनुष्यों की मानसिक दशा को उग्र करता है। इससे लोगों में आपसी द्वेष बढ़ता है। लोग छोटी-छोटी बातों पर उग्र होकर एक-दूसरे को मारने पर उतारू हो जाते हैं। हत्याएं, दुर्घटनाएं होती हैं। क्रोध की अधिकता होने से अनेक दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
कैसे बचें
अंगारक योग को शांत करने के लिए नित्य प्रतिदिन प्रत्येक व्यक्ति को चंदन का तिलक अपने मस्तक पर लगाना चाहिए। चंदन का इत्र या परफ्यूम लगाएं। सफेद चीजों का दान करें, जैसे दूध-दही, मक्खन, छाछ, पनीर का दान करें। माता या माता के समान स्त्री की सेवा करें। उन्हें उनकी आवश्यकता की वस्तुएं भेंट करें।












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