Pitru Paksha 2020: जानिए श्राद्धपक्ष में क्या करना चाहिए, क्या नहीं?

नई दिल्ली। पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के दिन होते हैं श्राद्धपक्ष। श्राद्धपक्ष के सोलह दिनों में मनुष्य अपने मृत पूर्वजों की संतुष्टि के लिए तर्पण, पिंडदान, अन्न्दान, वस्त्रदान आदि तरह के दान करते हैं। ताकि पितृ प्रसन्न् होकर अच्छे आशीर्वाद प्रदान करें। लेकिन अधिकांश लोगों को पता नहीं होता है कि श्राद्धपक्ष के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अनजाने में वे ऐसे कार्य कर जाते हैं जो इस दौरान करना निषेध होते हैं। कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें पितरों के नाम से जरूर करना चाहिए। आइए जानते हैं श्राद्धपक्ष में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

क्या करना चाहिए

क्या करना चाहिए

  • श्राद्धपक्ष में पितरों के निमित्त करने के लिए पांच प्रकार के दान बताए गए हैं। ये हैं गौ दान, अन्न् दान, वस्त्र दान, औषधि दान और स्वर्ण दान। इन पांच प्रकार में से कोई भी एक प्रकार का दान पितरों के नाम से किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
  • पंचमी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा को पितरों के नाम से गरीबों, जरूरतमंदों को भोजन करवाएं।
  • पितृपक्ष में नियमित रूप से भागवत महापुराण कथा का पाठ करना चाहिए। स्वयं नहीं पढ़ सकते तो कहीं सुनने जाएं।
  • पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। इसलिए पितृपक्ष में प्रतिदिन पीपल के पेड़ में कच्चे दूध में जल और शकर मिलाकर अर्पित करें।
  • पीपल के पेड़ में प्रतिदिन शाम के समय आटे के पांच दीपक जलाएं। दीपक में सरसो का तेल भरें।
गाय को घी-गुड़ रखकर ताजी रोटी खिलाएं

गाय को घी-गुड़ रखकर ताजी रोटी खिलाएं

  • पितरों के नाम से किसी वेदपाठी ब्राह्मण को भोजन करवाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा भेंट करें।
  • पितृपक्ष में प्रतिदिन गायों को हरी घास खिलाएं।
  • गाय को घी-गुड़ रखकर ताजी रोटी खिलाएं।
  • पितृदोष निवारण के लिए महामृत्युंजय मंत्र से शिवजी का अभिषेक करें।
  • प्रतिदिन पितृ कवच का पाठ करने से पितृदोष की शांति होती है।
  • पितृपक्ष में पितरों के नाम से फलदार, छायादार वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए।
 क्या नहीं करना चाहिए

क्या नहीं करना चाहिए

  • पितृपक्ष में गाय, कुत्ते, कौवे सहित किसी भी जीवधारी का अपमान नहीं करना चाहिए।
  • पितृपक्ष के दौरान परिवार सहित किसी भी बुजुर्ग व्यक्ति का अपमान ना करें।
  • इस पखवाड़े के दौरान मैथुन करना वर्जित माना गया है, क्योंकि इस दौरान आपके पितृ पृथ्वी पर आते हैं।
  • पारिवारिक कलह, लड़ाई-झगड़ों का त्याग करें।
  • झूठ बोलना, चोरी करना, कड़वे वचन कहना निषेध है।
  • पितृपक्ष के दौरान धर्म शास्त्रों का अपमान करना, निरादर करना सर्वथा वर्जित है।
  • पितृपक्ष के दौरान घर में मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • श्राद्धपक्ष के दौरान ब्राह्मणों का अपमान करने से सौ पीढ़ियों तक गरीबी भुगतना पड़ती है।

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