Uma Maheshwara Vrat 2020: जानिए उमा-महेश्वर व्रत का महत्व और पूजा विधि

नई दिल्ली। हिंदू धर्म शास्त्रों में भाद्रपद माह की पूर्णिमा के दिन किए जाने वाले उमा-महेश्वर व्रत के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। यह व्रत उन लोगों को जरूर करना चाहिए जिनका परिवार बिछड़ गया है या किसी कारण कोई अपने परिवार से दूर रह रहा है या किसी विवाद के कारण परिवार टूट गए हैं या भाई-बंधुओं में बन नहीं रही है। इस व्रत के प्रभाव से खोई प्रतिष्ठा और सम्मान भी पुन: पाया जा सकता है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण व्रत भी किया जाता है और इसी दिन से पितृपक्ष भी प्रारंभ होते हैं और पहला श्राद्ध पूर्णिमा का किया जाता है। यह व्रत 2 सितंबर 2020 बुधवार को आ रहा है।

कैसे किया जाता है उमा-महेश्वर व्रत

कैसे किया जाता है उमा-महेश्वर व्रत

उमा-महेश्वर व्रत के बारे में दो पुराणों के अलग-अलग मत हैं। भविष्यपुराण के अनुसार उमा-महेश्वर व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन किया जाता है, जबकि नारदपुराण का मत है कि यह व्रत भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि के दिन किया जाना चाहिए। यह व्रत स्त्रियों और पुरुषों को समान रूप से करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से परिवार के बीच प्रेम बढ़ता है, बुद्धिमान संतान की प्राप्ति होती है और सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है। इस व्रत में शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके उनका पूजन किया जाता है। भगवान को धूप, दीप, गंध, फूल तथा शुद्ध घी का भोजन अर्पण किया जाता है। व्रती को एक समय निराहार रहते हुए दूसरे समय भोजन ग्रहण करना चाहिए। व्रत पूजन से पहले अपनी इच्छित कामना की पूर्ति की प्रार्थना भगवान शिव-पार्वती से करें।

 उमा-महेश्वर व्रत की कथा

उमा-महेश्वर व्रत की कथा

पुराण कथाओं के अनुसार एक बार महर्षि दुर्वासा भगवान शंकर के दर्शन करके लौट रहे थे। रास्ते में उनकी भेंट भगवान विष्णु से हो गई। महर्षि ने शंकर जी द्वारा दी गई बिल्व पत्र की माला भगवान विष्णु को उपहार स्वरूप दी, लेकिन भगवान विष्णु ने उस माला को स्वयं न पहनकर गरुड़ के गले में डाल दी। इससे महर्षि दुर्वासा क्रोधित हो गए। उन्होंने भगवान विष्णु से कहा कि तुमने भगवान शंकर का अपमान किया है। इससे तुम्हारी लक्ष्मी चली जाएगी। क्षीर सागर से भी तुम्हें हाथ धोना पड़ेगा और शेषनाग भी तुम्हारी सहायता नहीं कर सकेंगे। यह सुनकर भगवान विष्णु ने महर्षि दुर्वासा को प्रणाम कर क्षमा याचना की और श्राप से मुक्त होने का उपाय पूछा। महर्षि दुर्वासा ने बताया कि भाद्रपद माह की पूर्णिमा के दिन तुम्हें इस श्राप से मुक्त होने के लिए उमा-महेश्वर व्रत करना होगा। भगवान शिव-पार्वती का विधि पूर्वक पूजन करके व्रत रखो तभी तुम्हें ये वस्तुएं मिल पाएंगी। भगवान विष्णु ने यह व्रत किया और इसके प्रभाव से लक्ष्मी जी समेत समस्त शक्तियां भगवान विष्णु को पुन: प्राप्त हो गईं।

पूर्णिमा तिथि

पूर्णिमा तिथि

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 1 सितंबर प्रात : 9.38 बजे से
  • पूर्णिमा तिथि पूर्ण 2 सितंबर प्रात: 10.51 बजे तक

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