Palmistry: कुंडली से जानिए कितने बच्चों के मम्मी-पापा बनेंगे आप?

लखनऊ। कुण्डली के बारह भावों के अन्तर्गत संसार की लगभग सारी चीजें समाहित है। हर एक भाव से विभिन्न चीजों के बारें में विश्लेषण किया जाता है। उसी प्रकार से पंचम भाव से सन्तान के बारें विचार किया जाता है। आईये आज हम अपको बताते है कि कैसे अपनी कुण्डली देखकर जान सकते है कि आपको कितनी संतान होगी। पंचम भाव में जितने ग्रह हों और इस स्थान पर जितने ग्रहों की दृष्टि हो उतनी सन्तान संख्या समझनी चाहिए। पुरूष ग्रहों के योग और दृष्टि से पुत्र और स्त्री ग्रहों के योग और दृष्टि से कन्या संख्या का अनुमान करना चाहिए। तुला तथा वृष का चन्द्रमा पंचम एवं नवम भावों में बैठा हो तो एक पुत्र होता है। पंचम में राहु या केतु हो तो भी एक पुत्र होता है। पंचम भाव में सूर्य शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो तीन पुत्र हो सकते है।

पंचम में विषम राशि

पंचम में विषम राशि

पंचम में विषम राशि का चन्द्र शुक्र के वर्ग में हो या चन्द्र शुक्र से युत हो तो अधिक पुत्र होते है।गुरू, चन्द्र और सूर्य इन तीनों ग्रहों के स्पष्ट राश्यादि जोड़ने पर जितनी राशि संख्या हो उतनी सन्तान समझनी चाहिए। पंचम भाव से पंचमेश से शुक्र या चन्द्रमा जिस राशि में बैठै हों उस राशि पर्यन्त की संख्या के बीच में जितनी राशि संख्या हो उतनी सन्तान संख्या जाननी चाहिए।

पांचवें भाव में गुरू

पांचवें भाव में गुरू

पांचवें भाव में गुरू हो, सूर्य स्वक्षेत्री हो, पंचमेश पंचम में हो तो 5 सन्तान समझनी चाहिए। कुम्भ राशि का शनि पंचम भाव में बैठा हो तो 3 पुत्र होते हैं। मकर राशि में 6 अंश 40 कला के अन्दर का शनि हो तो 2 पुत्र होते है।

पंचम भाव में मंगल हो तो 2 पुत्र

पंचम भाव में मंगल हो तो 2 पुत्र

पंचम भाव में मंगल हो तो 2 पुत्र, गुरू हो तो 3 पुत्र और पंचम भाव में सूर्य मंगल दोनों हो तो 4 पुत्र व सूर्य, गुरू हो तो 5 सन्ताने, मंगल, गुरू हो तो 6 सन्तानें। पंचम भाव में सूर्य, मंगल व गुरू तीनों हो तो 7 सन्ताने होती है। पंचम भाव में चन्द्रमा हो तो 2 कन्यायें होती है। शुक्र हो तो 3 कन्यायें और शनि बैठा हो तो 4 कन्यायें होने की सम्भवना रहती है।

शनि राशि हो तो 6 सन्तानें

शनि राशि हो तो 6 सन्तानें

लग्न में राहु, पंचम भाव में गुरू और नवम में शनि राशि हो तो 6 सन्तानें होती है। नौं भाव में शनि और नवमेश पंचम में हो तो 5 सन्तानें। पाॅचवें भाव में शनि हो और पंचमेश छठें, आठवें व बारहवें भाव में हो तो अधिकतर दूसरे विवाह के बाद सन्तान होती है।

कर्क राशि का चन्द्रमा पंचम भाव में बैठा

कर्क राशि का चन्द्रमा पंचम भाव में बैठा

कर्क राशि का चन्द्रमा पंचम भाव में बैठा हो तो अल्प सन्तान का योग होता है। पंचमेश नीच का होकर छठें, आठवें व बारहवें भाव में स्थित हो व पापग्रह से युत हो तो भी काकवंध्या योग होता है।

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