नवरात्रि में क्यों और कैसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ?

दुर्गा सप्तशती के पाठ से हर मनोकामना पूर्ण होती है और बिगड़े काम बनते हैं।

लखनऊ। चैत्र नवरात्रों का आरम्भ 28 मार्च से हो रहा है। इस बार खास बात है कि नवसंत्सर के दिन से ही नवरात्र की शुरूआत हो रही है। सतकर्म, परोपकार, धर्म, कर्म का कर्तव्य और निःस्वार्थ सेवा किये बिना आदि शक्ति की कृपा संभव नहीं है। मां दुर्गा मिष्ठान की नहीं भाव की भूखी है। read also : चैत्र नवरात्र 2017: जानिए घट-स्थापना की पूजा और मुहूर्त का समय

नवरात्रि में क्यों और कैसे करें दुर्गा शप्तशती का पाठ?

आइये जानते है कि नवरात्र के शुभ अवसर पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए क्या उपाय करें।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-

इस वर्ष नवरात्र का शुभारम्भ 28 मार्च से एंव समापन 05 अप्रैल की नवमी तिथि को होगा। 28 मार्च के दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र व मीन राशि में चन्द्रमा रहेगा।
प्रथम मुहूर्त- सुबह 8: 30 मिनट से 10:36 मि0 तक। दूसरा मूहूर्त- अपरान्ह1:30 मिनट से 02:32 मिनट तक।

दुर्गा सप्तशती के अध्याय के पाठों से मनोकामना पूर्ण होगी-

दुर्गा सप्तशती के अध्याय के पाठों से मनोकामना पूर्ण होगी-

1-प्रथम अध्याय का पाठ करने हर प्रकार की चिन्ता व तनाव दूर होगा।
2- द्वितीय अध्याय का पाठ करने से मुकद्मे, विवाद व भूमि आदि सेसम्बन्धित मामलों में विजय मिलेगी।
3- तृतीय अध्याय का पाठ करने से मां भगवती की कृपा से आपके शत्रुओं का दमन होगा।
4- चतुर्थ अध्याय का पाठ करने से आपके आत्म-विश्वास व साहस में वृद्धि होगी।
5- पंचम अध्याय का पाठ करने से घर व परिवार में सुख शान्ति बनी रहती है।

विशेष कामना की पूर्ति

विशेष कामना की पूर्ति

6- षष्ठम अध्याय का पाठ करने से मन का भय, आशंका व नकारात्मक विचारों में कमी आयेगी।
7- सप्तम अध्याय का पाठ विशेष कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है।
8- अष्टम अध्याय का पाठ करने से पति-पत्नी का आपसी तनाव समाप्त होता है एंव मनचाहे साथी की प्राप्ति भी होती है।
9- नवम अध्याय का पाठ करने से परदेश गया व्यक्ति या खोया हुआ व्यक्ति शीघ्र ही वापस लौट आता है।
10-दशम अध्याय का पाठ करने से पुत्र की प्राप्ति होती है एंव मान-सम्मान में वुद्धि होती है।

 व्यवसाय में प्रगति

व्यवसाय में प्रगति

11- व्यापारी वर्ग को दुर्गा शप्तशती ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने से व्यवसाय में प्रगति होती है।
12- जो लोग घर की कलह से परेशान है एंव किसी काम में प्रगति नहीं होती है, उन्हें द्वादश अध्याय का पाठ करने से लाभ मिलता है।
13- त्रियोदश अध्याय का पाठ करने से घर का वास्तु दोष, मानसिक क्लेश, परिवार की प्रगति में आ रही बाधा दूर होती है।

नवरात्रि में क्या करें

नवरात्रि में क्या करें

1-मन्दिर जाना।2-देवी को प्रतिदिन जल अर्पित करना।3-नंगे पैर रहना।4-अपने मॉ-पिता की सेवा करें।5-अष्टमी व नमवमी को मॉ का विशेष श्रंगार करना। 6-कन्याओं को भोजन कराना।7-मॉ दुर्गा की अखण्ड ज्योति जलाना।

 क्या न करें-

क्या न करें-

1-नौं दिनों तक नाखून, सेविंग व बाल न कटवाना।2-छौंख, बघार न लगायें।3-भोजन मेे लहसुन व प्याज का सेंवन न करें।4-छल, प्रपंच व झूठ न बोलें।5-किसी को अपशब्द न कहें।6-किसी स्त्री के साथ संसर्ग न करें।7-नौं दिनों तक बिस्तर त्याग कर भूमि पर शयन करें।

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