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PALMISTRY: हथेली में तिल से बनने वाले पांच योग, जो जीवन को सबसे ज्यादा करते हैं प्रभावित

नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र में हथेली के छोटे से छोटे चिन्ह का बड़ा महत्व होता है। इनमें सबसे प्रमुख है तिल। तिल लाल, काला या भूरा होता है जो छोटे या बड़े आकार का हो सकता है। हथेली में इसकी स्थिति के अनुसार यह जीवन को प्रभावित करता है। हस्तरेखा शास्त्र में तिल से बनने वाले अनेक योगों का वर्णन मिलता है जिनमें से पांच ऐसे प्रमुख योग हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।

आइए जानते हैं...

 काले रंग का तिल हो तो...

काले रंग का तिल हो तो...

  • ऋण योग: हथेली में मध्यमा अंगुली के मूल में शनि पर्वत होता है और इस पर पाई जाने वाली सीधी रेखा शनि रेखा कहलाती है। यदि इस शनि रेखा के दाहिनी ओर काले रंग का तिल हो तो ऋण योग बनता है। जिस जातक के हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति आजीवन किसी न किसी रूप में ऋणी बना रहता है। वह एक कर्ज उतारता है और दूसरा उस पर चढ़ जाता है। ऐसे जातक के जीवन में आय की अपेक्षा व्यय अधिक होता है।
  • कारक योग: हथेली में तर्जनी अंगुली के मूल में गुरु पर्वत होता है और इस पर पाई जाने वाली सीधी रेखा गुरु रेखा कहलाती है। यदि गुरु रेखा के बायीं ओर लाल या काली तिल हो तो उस जातक के हाथ में कारक योग का निर्माण होता है। जिसके हाथ में यह योग होता है वह जीवन में समस्त प्रकार के सुख प्राप्त करता है। ऐसा जातक सफल बिजनेसमैन बनता है। इसके जीवन में धन की कमी नहीं होती और अपने कर्म के बल पर सफलता हासिल करता जाता है।
सके हाथ में समुद्र योग होता है...

सके हाथ में समुद्र योग होता है...

  • समुद्र योग: अनामिका अंगुली के नीचे सूर्य पर्वत होता है और इस पर पाई जाने वाली रेखा सूर्य रेखा कहलाती है। यदि सूर्य रेखा के नीचे का उसके दाहिनी ओर काले रंग का तिल हो तो समुद्र योग बनता है। जिसके हाथ में समुद्र योग होता है वह व्यक्ति रातों रात ख्याति अर्जित करता है। देश-दुनिया का प्रसिद्ध व्यक्ति इस योग वाला व्यक्ति होता है। राजा के समान सुख भोगने वाला तथा देश-विदेश की यात्राएं करने वाला होता है।
  • शारदा योग: हाथ में कनिष्ठिका अंगुली के नीचे बुध पर्वत होता है। यदि बुध पर्वत के नीचे या उसके बायीं ओर काला तिल हो तो शारदा योग बनता है। जिसके हाथ में शारदा योग होता है उसके जीवन में किसी वस्तु का अभाव नहीं होता है। ऐसा व्यक्ति धार्मिक प्रवृत्ति का होता है और सदाचार होता है। धर्म के मार्ग पर चलकर ऐसा व्यक्ति बड़ा संत तक बन सकता है।
 विवाहेत्तर संबंध

विवाहेत्तर संबंध

अंगूठे के मूल में फैला हुआ पूरा स्थान शुक्र पर्वत होता है और इस पर मौजूद रेखा शुक्र रेखा होती है। यदि शुक्र रेखा के पास में या उसके ठीक नीचे लाल या काला तिल का चिन्ह हो तो छत्र योग होता है। छत्र योग जिसके हाथ में हो वह व्यक्ति साहसी, रसिक मिजाज का और गृहस्थ सुख को भोगने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति के विवाहेत्तर संबंध होते हैं।

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