बुध मार्गी होने पर धारण करें पन्ना या इसके उपरत्न, मिलेगी आर्थिक समृद्धि
नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में बुध को शिक्षा, ज्ञान, मानसिक संयम, अर्थव्यवस्था और व्यापार व्यवसाय का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। जन्मकुंडली में बुध मजबूत हो तो व्यक्ति को कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता, खासकर शिक्षा और व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र में। वहीं यदि कुंडली में बुध कमजोर है तो व्यक्ति शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा अच्छा नहीं कर पाता है। बुध को मजबूत बनाने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं उनमें से एक है बुध के रत्न या उपरत्न धारण करना। लेकिन रत्न को हमेशा ग्रह की मार्गी स्थिति में ही धारण करना चाहिए।

बुध मार्गी होने वाला है
26 जुलाई से वक्री चल रहा बुध 19 अगस्त को प्रातः 9 बजकर 52 मिनट पर मार्गी हो जाएगा। बुध के मार्गी होने से बुध के शुभ प्रभाव सभी राशि वालों को मिलने लगेंगे। बुध का रत्न हरा पन्ना है, लेकिन यह काफी कीमती होने के कारण सभी लोग धारण नहीं कर पाते। उनके लिए बुध के उपरत्न उपलब्ध हैं जो पहने जा सकते हैं। बुध के उपरत्न हैं ग्रीन टरमलाइन और पेरिडॉट। बुध के रत्नों को सोने और चांदी में धारण किया जा सकता है।
आइए जानते हैं इसे बुध के रत्नों को किसे और क्यों धारण करना चाहिए

पन्ना या पेरिडॉट सोने में धारण करें
- बुध का प्रभाव व्यापार-व्यवसाय पर रहता है। जो लोग अपने बिजनेस में तरक्की पाना चाहते हैं। वे बुध के मार्गी होते ही पन्ना या पेरिडॉट सोने में धारण करें। साथ ही प्रत्येक बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाएं।
- विद्यार्थियों को पन्ना या इसके उपरत्न जरूर पहनना चाहिए। इससे शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलने लगती है। जो छात्र विदेशों में पढ़ाई का सपना देखते हैं उन्हें पन्ना धारण करने के साथ ही नियमित गणेशजी की पूजा करना चाहिए।
- मानसिक मजबूती के लिए भी पन्ना और इसके उपरत्न धारण किए जा सकते हैं। इससे दिमाग में स्थिरता आती है। मन भटकता नहीं है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।
- जन्मकुंडली में यदि सूर्य के साथ शुभ राशि में बुध बैठा हो तो बुधादित्य योग बनता है। यह योग होने पर भी कई बार अन्य ग्रह स्थितियां ठीक नहीं होने के कारण इस योग का लाभ नहीं मिल पाता है। यदि ऐसा है तो पन्ने की अंगूठी या पेंडेंट पहनना चाहिए।
- जन्मकुंडली में जन्म के समय से ही बुध वक्री हो तो जीवन में कई बार अनेक समस्याएं आती हैं। ऐसी स्थिति में बुध की शांति के उपाय किए जाते हैं। इसके लिए प्रत्येक बुधवार को भगवान गणेश को 108 दुर्वांकुर अर्पित किए जाते हैं।













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