जानिए आपकी कुंडली में कौन-सा है योग?
नई दिल्ली । जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएं, धन, संपत्ति, वाहन आदि कौन नहीं चाहता। कई लोगों को ये सब पैतृक रूप से प्राप्त हो जाता है, तो कई लोग इन्हें पाने के लिए जीवनभर कठिन परिश्रम करते रहते हैं। इसके बावजूद सफलता कुछ ही लोगों के हाथ लग पाती है। ऐसा क्यों होता है?
इसका राज आपकी जन्म कुंडली में छुपा हुआ है। कुंडली में ऐसे अनेक योग होते हैं जो व्यक्ति को जमीन से उठाकर शीर्ष तक पहुंचा सकते हैं और कई ऐसे योग भी होते हैं जो व्यक्ति को शीर्ष से फर्श पर लाकर पटक देते हैं। निश्चित रूप से कर्म की अपनी महत्ता है लेकिन भाग्य का साथ होना भी आवश्यक है।
आइये आज हम जानते हैं ऐसे ही कुछ योगों के बारे में:

रज्जु योग
जन्मकुंडली में सभी ग्रह चर राशियों में हों तो रज्जु योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला मनुष्य भ्रमणशील, सुंदर, विदेश यात्राएं करने वाला, सुखी, दुष्ट स्वभाव और स्थान परिवर्तन से उन्नति करने वाला होता है।

मूसल योग
कुंडली में समस्त ग्रह स्थिर राशियों में हों तो मूसल योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति ज्ञानी, धनी, राजमान्य, प्रसिद्ध, अनेक पुत्रों वाला, विधायक एवं शासन का बड़ा अधिकारी होता है।

समस्त ग्रह कुंडली
- नल योग: समस्त ग्रह कुंडली में द्विस्वभाव राशियों में हों तो नल योग होता है। जिसकी कुंडली में यह योग है वह जातक हीन वाला अधिक अंगवाला होता है। धन संचय करना बखूबी जानता है। अति चतुर, राजनीतिज्ञ और दांव-पेंच में निपुण होता है। चुनावों में जीत हासिल करता है।
- माला योग: बुध, गुरु और शुक्र चौथे, सातवें और 10वें स्थान में हों और शेष ग्रह इन स्थानों से भिन्न स्थानों में हों तो माला योग होता है। इस योग के होने से जातक धनी, वस्त्राभूषण युक्त, तरह-तरह के भोजन पसंद करने वाला, अनेक स्त्रियों से प्रेम करने वाला होता है। सांसदों की कुंडली में भी ऐसा योग पाया जाता है।
- सर्प योग: सूर्य, शनि और मंगल 4, 7, 10वें स्थान में हों और चंद्र, गुरु, शुक्र और बुध अन्य स्थानों में हों तो सर्प योग होता है। ऐसे योग वाला व्यक्ति कुटिल, निर्धन, दुखी, दीन, भिखारी होता है। चंदा मांगकर खा जाने वाला और सर्वत्र निंदा का पात्र होता है।
- गदा योग: व्यक्ति की जन्म कुंडली में समीपस्थ दो केंद्र स्थान जैसे प्रथम, चतुर्थ या सप्तम, दशम में समस्त ग्रह हों तो गदा योग बनता है। इस योग वाला व्यक्ति धनी, धर्मात्मा, शास्त्रों का जानकार, संगीतप्रिय और पुलिस में नौकरी करने वाला होता है। जिसकी कुंडली में यह योग हो उसका भाग्योदय 28 वर्ष की आयु में होता है।
- पक्षी योग: कुंडली के चतुर्थ और दशम भाव में समस्त ग्रह हों तो विहग पक्षी योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति राजदूत, गुप्तचर, भ्रमणशील, ढीठ, कलहप्रिय और धनी होता है। शुभग्रह उक्त स्थानों में हों और पापग्रह 3,6,11वें स्थान में हों तो जातक न्यायाधीश होता है।
- चर मेष, कर्क, तुला, मकर
- स्थिर वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ
- द्विस्वभाव मिथुन, कन्या, धनु, मीन

सूर्य, शनि और मंगल 4, 7, 10वें स्थान में













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